8 जनवरी 2026। मध्य प्रदेश ने अपनी तीन विशिष्ट अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों को UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH) की राष्ट्रीय सूची में शामिल कराने के लिए प्रस्ताव भेजा है। इनमें मैहर बैंड, अगरिया लोह परंपरा और निमाड़ अंचल का पारंपरिक भोजन शामिल हैं।
यह प्रस्ताव मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने UNESCO के लिए देश की नोडल एजेंसी संगीत नाटक अकादमी (SNA) को सौंपा है। प्रस्ताव के साथ इन परंपराओं का विस्तृत दस्तावेज, फोटो, वीडियो और स्थानीय समुदायों की राय भी साझा की गई है। राष्ट्रीय सूची में चयनित विरासतों में से हर दो वर्ष में एक को UNESCO की विश्व अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में नामांकन के लिए भेजा जाता है। ऐसे में इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलने पर मध्य प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और सांस्कृतिक पहचान मिल सकती है।
मैहर बैंड की स्थापना उस्ताद अलाउद्दीन खान ने की थी। यह समूह भारतीय और पाश्चात्य संगीत के अनोखे संगम के लिए जाना जाता है और राज्य की समृद्ध संगीत परंपरा का जीवंत उदाहरण है। वहीं अगरिया लोह परंपरा अगरिया जनजाति द्वारा की जाने वाली पारंपरिक लोहे की गलाने और निर्माण की कला है, जो आज के दौर में अस्तित्व की चुनौती झेल रही है और संरक्षण की मांग कर रही है। निमाड़ क्षेत्र का भोजन पश्चिमी मध्य प्रदेश की कृषि आधारित संस्कृति, स्थानीय स्वाद और सामाजिक विविधता को दर्शाता है, जिसमें सदियों पुराने पारंपरिक व्यंजन शामिल हैं।
मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के निदेशक (योजना) प्रशांत सिंह बघेल के अनुसार, इन तीनों सांस्कृतिक धरोहरों के प्रस्ताव पूरे शोध और स्थानीय सहभागिता के साथ SNA को भेजे गए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसी वर्ष इन पर राष्ट्रीय सूची में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले भगोरिया नृत्य, नर्मदा परिक्रमा और पाटनगढ़ की गोंड पेंटिंग्स को राष्ट्रीय सूची में स्थान मिल चुका है, जबकि भोपाल को ‘साहित्य शहर’ के रूप में मान्यता दिलाने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है।














