24 फरवरी 2026। अमेरिका अब अपने क्लासिफाइड सैन्य नेटवर्क में एआई की दौड़ को अगले स्तर पर ले जाता दिख रहा है। खबर है कि रक्षा विभाग ने xAI के Grok चैटबॉट को संवेदनशील मिलिट्री सिस्टम में इंटीग्रेट करने के लिए समझौता किया है। इससे एआई सेक्टर में काम कर रही कंपनी Anthropic पर सीधा दबाव बना है, जिसने अपने मॉडल की सेफ्टी सीमाएं हटाने से इंकार कर दिया था।
इस समझौते की शुरुआत में रिपोर्ट The New York Times ने दी और बाद में Axios ने इसकी पुष्टि की। अगर प्रक्रिया पूरी होती है तो Grok अमेरिकी सेना के सबसे संवेदनशील नेटवर्क पर इस्तेमाल होने वाला दूसरा एआई सिस्टम बन जाएगा। इन नेटवर्क पर खुफिया विश्लेषण, हथियार विकास और युद्ध संचालन जैसे काम होते हैं। अब तक Anthropic का मॉडल, Palantir Technologies के साथ साझेदारी के जरिए, ऐसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध इकलौता विकल्प था।
मामला तब और गर्म हुआ जब रक्षा सचिव Pete Hegseth ने Anthropic के सीईओ Dario Amodei को पेंटागन में बैठक के लिए बुलाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार चाहती है कि मॉडल को “सभी कानूनी उद्देश्यों” के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रतिबंधों के बिना उपलब्ध कराया जाए। सूत्रों का दावा है कि ऐसा न करने पर कंपनी को “सप्लाई चेन रिस्क” के तौर पर चिह्नित किया जा सकता है, जो आम तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में इस्तेमाल होने वाला सख्त टैग है।
Anthropic ने स्पष्ट किया है कि वह अपने मॉडल से वे सेफगार्ड नहीं हटाएगा जो इसे बड़े पैमाने पर निगरानी या पूरी तरह स्वायत्त हथियार प्रणालियों में इस्तेमाल होने से रोकते हैं। दूसरी तरफ, रिपोर्ट्स के मुताबिक xAI इन शर्तों पर सहमत हो गया है, हालांकि कंपनी ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि Google अपने Gemini मॉडल को क्लासिफाइड सिस्टम में सीमित उपयोग की मंजूरी देने के करीब है, जबकि OpenAI अभी सेफ्टी टेक्नोलॉजी को लेकर सावधानी बरत रहा है।
पेंटागन के कुछ अधिकारियों का मानना है कि अगर Anthropic को हटाकर किसी अन्य मॉडल पर शिफ्ट किया जाता है तो शुरुआती तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं। बताया जाता है कि पिछले महीने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति Nicolás Maduro से जुड़े एक ऑपरेशन के दौरान एआई सिस्टम का उपयोग हुआ था। यह पहली बार माना जा रहा है जब किसी सक्रिय सैन्य कार्रवाई में एआई की भूमिका सामने आई।
Anthropic लंबे समय से खुद को जिम्मेदार एआई के समर्थक के रूप में पेश करता आया है। अमोदेई कई बार अनियंत्रित एआई से जुड़े जोखिमों, खासकर “ऑटोनॉमी रिस्क”, पर चेतावनी दे चुके हैं। हाल ही में कंपनी की सेफगार्ड रिसर्च टीम के प्रमुख मृणांक शर्मा ने अचानक इस्तीफा देते हुए कहा कि “दुनिया खतरे में है।”
स्पष्ट है कि अब बहस सिर्फ टेक्नोलॉजी की नहीं है, बल्कि यह तय करने की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर एआई को कितनी आजादी दी जानी चाहिए। सवाल सीधा है, ताकत पहले आए या नियंत्रण? आने वाले महीनों में यही टकराव एआई इंडस्ट्री की दिशा तय कर सकता है।














