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Telegram vs WhatsApp: प्राइवेसी पर फिर टकराव, Durov का तंज—“आपकी न्यूड तस्वीरें हमारे पास सुरक्षित हैं”

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 134

13 अप्रैल 2026। Pavel Durov ने एक बार फिर WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी पर सवाल उठाए हैं। Telegram के फाउंडर और CEO Durov का आरोप है कि WhatsApp यूज़र्स को उनकी डेटा सुरक्षा को लेकर गुमराह करता है, जबकि Telegram संवेदनशील कंटेंट के लिए ज्यादा मजबूत सुरक्षा देता है।

Durov ने Meta Platforms के स्वामित्व वाले WhatsApp के सिक्योरिटी मॉडल को “कंज्यूमर फ्रॉड” तक बता दिया। उनका कहना है कि ऐप भले ही एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का दावा करता हो, लेकिन यूज़र्स के मैसेज अक्सर क्लाउड बैकअप के रूप में Apple और Google के सर्वर पर साधारण टेक्स्ट में सेव हो जाते हैं।

रविवार को किए गए कई पोस्ट में Durov ने कहा कि WhatsApp न सिर्फ मैसेज का बैकअप स्टोर करता है, बल्कि यह भी ट्रैक करता है कि यूज़र किससे बातचीत कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह डेटा तीसरे पक्षों को “साल में हजारों बार” दिया जाता है, जिससे प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।

इसी दौरान एक यूज़र ने जब कहा कि वह सिर्फ Telegram पर ही निजी तस्वीरें शेयर करता है, तो Durov ने तंज कसते हुए जवाब दिया—“आपके भरोसे के लिए धन्यवाद – आपकी न्यूड तस्वीरें हमारे पास सुरक्षित हैं।”

हालांकि, Telegram खुद भी पूरी तरह निर्दोष नहीं है। प्लेटफ़ॉर्म डिफ़ॉल्ट रूप से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन लागू नहीं करता। कंपनी के अनुसार, केवल ‘Secret Chats’ फीचर में ही पूरी एंड-टू-एंड सुरक्षा मिलती है, जबकि सामान्य चैट्स क्लाउड में स्टोर होती हैं।

सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्लाउड बैकअप किसी भी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की सबसे कमजोर कड़ी हो सकता है। अगर यह डेटा एन्क्रिप्टेड चैनल के बाहर स्टोर होता है, तो कानूनी अनुरोधों या डेटा लीक के मामलों में इसे एक्सेस किया जा सकता है।

दूसरी तरफ, Meta का कहना है कि WhatsApp के मैसेज पूरी तरह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होते हैं और कंपनी खुद भी उन्हें नहीं पढ़ सकती। साथ ही, यूज़र्स को एन्क्रिप्टेड क्लाउड बैकअप का विकल्प भी दिया जाता है, जिसे वे चाहें तो ऑन कर सकते हैं।

इस बीच, जनवरी में कई देशों के शिकायतकर्ताओं ने Meta के खिलाफ अमेरिका की एक अदालत में क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया, जिसमें WhatsApp की प्राइवेसी को लेकर भ्रामक दावे करने का आरोप लगाया गया है।

Durov पहले भी WhatsApp को “जासूसी का टूल” बता चुके हैं और यूज़र्स को इससे दूर रहने की सलाह देते रहे हैं, खासकर 2014 में Facebook (अब Meta) द्वारा इसके अधिग्रहण के बाद। वहीं, Meta के प्रवक्ता ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए “बेबुनियाद और गलत” बताया है।

Bottom line: दोनों प्लेटफॉर्म एक-दूसरे पर उंगली उठा रहे हैं, लेकिन असली जिम्मेदारी यूज़र पर भी है—आप कौन-सी सेटिंग्स ऑन रखते हैं, वही आपकी प्राइवेसी तय करती हैं।

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