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चीन का बड़ा कदम: AI से बने “डिजिटल इंसानों” पर सख्ती, बच्चों के साथ वर्चुअल रिश्तों पर रोक

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 198

3 अप्रैल 2026। चीन अब AI से तैयार किए जा रहे “डिजिटल इंसानों” पर कड़ा नियंत्रण लगाने की तैयारी में है। शुक्रवार को देश के साइबरस्पेस रेगुलेटर ने इस क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए, जिनका मकसद तेजी से बढ़ती इस तकनीक को सीमाओं में रखना है।

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, इंटरनेट पर मौजूद हर डिजिटल इंसान वाले कंटेंट पर साफ़ तौर पर “डिजिटल इंसान” का लेबल लगाना अनिवार्य होगा, ताकि यूजर्स भ्रमित न हों। खास बात यह है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ ऐसे AI पात्रों के “करीबी वर्चुअल रिश्ते” बनाने पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव है, ताकि बच्चों में भावनात्मक निर्भरता या लत जैसी समस्याएं न बढ़ें। इन नियमों पर 6 मई तक जनता से सुझाव मांगे गए हैं।

नियमों में यह भी साफ किया गया है कि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी पहचान या निजी जानकारी का इस्तेमाल कर डिजिटल इंसान बनाना गैरकानूनी होगा। साथ ही, पहचान सत्यापन (KYC) जैसी प्रणालियों को धोखा देने के लिए AI अवतार का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित रहेगा।

कंटेंट पर भी सख्त नियंत्रण की बात कही गई है। डिजिटल इंसानों को ऐसा कोई भी सामग्री फैलाने की अनुमति नहीं होगी जो राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ हो, सरकार के खिलाफ विद्रोह भड़काए, अलगाववाद को बढ़ावा दे या राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाए।

इसके अलावा, प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे अश्लील, हिंसक या भेदभाव फैलाने वाले कंटेंट को रोकें। अगर कोई यूजर आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी प्रवृत्ति दिखाता है, तो सेवा प्रदाताओं को हस्तक्षेप कर पेशेवर मदद उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

यह कदम ऐसे समय पर आया है जब चीन अपनी नई पाँच-वर्षीय नीति के तहत पूरी अर्थव्यवस्था में AI के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाना चाहता है। साफ है, बीजिंग तकनीक को आगे बढ़ाने के साथ-साथ उस पर सख्त नियंत्रण भी बनाए रखना चाहता है।

रेगुलेटर के मुताबिक, इन नियमों का मकसद डिजिटल इंसान इंडस्ट्री में स्पष्ट “रेड लाइन” तय करना और इसके स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करना है। सरकार अब इस तकनीक को सिर्फ एक इंडस्ट्री ट्रेंड नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा, सार्वजनिक हित और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक रणनीतिक मुद्दा मान रही है।

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