28 मार्च 2026। अमेरिका में बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया की बढ़ती लत को लेकर बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। कैलिफ़ोर्निया की एक जूरी ने Meta Platforms और Google को कुल 6 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया है। यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के “लत लगाने वाले डिज़ाइन” को लेकर एक ऐतिहासिक मुकदमे के रूप में देखा जा रहा है।
जूरी के फैसले के मुताबिक, Meta को 4.2 मिलियन डॉलर और Google को 1.8 मिलियन डॉलर चुकाने होंगे। यह मुकदमा 20 वर्षीय Kaley नाम की युवती ने दायर किया था, जिसने आरोप लगाया कि कम उम्र में ही उसे YouTube और Instagram की लत लग गई थी। उसने कहा कि ‘इनफिनिट स्क्रॉलिंग’ जैसे फीचर्स जानबूझकर यूज़र्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए बनाए गए हैं।
कुल हर्जाने में से करीब 3 मिलियन डॉलर पीड़िता को मुआवज़े के तौर पर मिलेंगे, जबकि बाकी रकम दंडात्मक हर्जाने के रूप में दी जाएगी। हालांकि दोनों कंपनियों ने इस फैसले से असहमति जताते हुए अपील करने की बात कही है।
इस मामले में TikTok और Snapchat को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन सुनवाई शुरू होने से पहले ही उन्होंने समझौता कर लिया।
इसी बीच, न्यू मैक्सिको में एक अलग मामले में Meta पर 375 मिलियन डॉलर का भारी जुर्माना लगाया गया। कंपनी पर आरोप है कि उसने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाया और यौन शोषण से जुड़े मामलों में अहम जानकारी छिपाई। जूरी ने यह भी कहा कि कंपनी के पर्सनलाइज्ड एल्गोरिदम का दुरुपयोग बाल यौन अपराधियों द्वारा किया जा सकता है।
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ी है। ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेचर्स’ के अनुसार, 2025 में कम से कम 20 राज्यों ने सोशल मीडिया और बच्चों से जुड़े नए कानून बनाए हैं।
आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर और बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं। कैलिफ़ोर्निया के ओकलैंड स्थित फेडरल कोर्ट में इस गर्मी में एक बड़े मल्टी-स्टेट मुकदमे की सुनवाई शुरू होने वाली है, जिसमें Instagram, YouTube, TikTok और Snapchat जैसे प्लेटफॉर्म्स शामिल होंगे। वहीं जुलाई में लॉस एंजेलिस में भी इसी तरह का एक और केस शुरू होगा।
वैश्विक स्तर पर भी Meta पर दबाव बढ़ रहा है। यूरोप में कंपनी पर एंटीट्रस्ट और डेटा सुरक्षा से जुड़े मामलों में भारी जुर्माने लगाए जा चुके हैं। साथ ही ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, स्पेन, यूके और अन्य देश बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस को सीमित करने पर काम कर रहे हैं।
स्पष्ट है कि अब सोशल मीडिया कंपनियों के लिए “यूज़र एंगेजमेंट” का खेल महंगा पड़ रहा है, खासकर जब बात बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की हो।















