28 मई 2026। भारत अपने सुखोई-30MKI लड़ाकू विमानों के बड़े आधुनिकीकरण की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अपग्रेड भारतीय वायुसेना की रीढ़ माने जाने वाले इन विमानों को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के माहौल में ज्यादा सक्षम और सुरक्षित बनाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने सुखोई-30MKI विमानों के लिए अत्याधुनिक एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग GPS एंटेना सिस्टम खरीदने हेतु ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोज़ल’ (RFP) जारी किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युद्ध के दौरान दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक बाधाओं के बीच भी विमानों की नेविगेशन और हथियार संचालन क्षमता को बरकरार रखना है।
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में जैमिंग और स्पूफिंग बेहद अहम तकनीकें मानी जाती हैं। जैमिंग के जरिए दुश्मन रेडियो और GPS सिग्नलों को बाधित करता है, जबकि स्पूफिंग फर्जी सिग्नल भेजकर विमान के नेविगेशन सिस्टम को भ्रमित करने की कोशिश करती है। नए सिस्टम इन खतरों से निपटने में मदद करेंगे।
भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल करीब 258 सुखोई-30MKI लड़ाकू विमान हैं। प्रस्तावित तकनीकी सुधार ‘सुपर सुखोई’ आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा माना जा रहा है। रक्षा मंत्रालय लगभग 300 नए एंटेना सिस्टम हासिल करने की योजना पर काम कर रहा है।
यह अपग्रेड ऐसे समय हो रहा है जब भारत पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर विमानों की खरीद और निर्माण विकल्पों पर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स में रूसी Su-57 फाइटर जेट को इस दौड़ में प्रमुख दावेदार बताया गया है।
हाल ही में रूस के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की उस फैक्टरी का दौरा किया था, जहां लाइसेंस के तहत सुखोई विमानों का निर्माण किया जाता है। Su-30MKI, रूसी Su-30 का भारतीय जरूरतों के मुताबिक विकसित विशेष संस्करण है, जिसे वर्ष 2002 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था।
रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के CEO वादिम बडेखा ने जनवरी में संकेत दिए थे कि भारत में Su-57 के निर्माण को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। मॉस्को ने नवंबर 2025 में दुबई एयरशो के दौरान भारत में Su-57 के पूर्ण लाइसेंस-आधारित उत्पादन का प्रस्ताव भी रखा था।
भारत सरकार का ‘मेक इन इंडिया’ अभियान रक्षा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। वर्तमान में भारतीय सशस्त्र बलों के लगभग 60 प्रतिशत रक्षा उपकरण सोवियत या रूसी मूल के हैं, जबकि सुखोई-30MKI अकेले भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।















