🔴 TRENDING NOW!
भीम ऐप की ‘मीठी दिवाली 2026’ पहल, हर 7वें ट्रांजैक्शन पर बच्चों की शिक्षा में मिलेगी मदद पेट्रोकेमिकल्स, फर्टिलाइजर्स और दवा निर्माण में मप्र में अनेक अवसर, निवेशकों को सुविधा, साथ और सहयोग भी देगी हमारी सरकार - मुख्यमंत्री डॉ. यादव OpenAI के AI एजेंटों की करतूत! सुरक्षा अलर्ट बंद किए, मॉनिटरिंग सिस्टम भी हटाया कार्बाइड गन और कार्बाइड लैम्प के उपयोग पर लगायें सख्ती से अंकुश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जन विश्वास अभियान के दौरान सभी अधिकारी फील्ड में रहकर जन समस्याओं का करें निराकरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 100 मिनट में 100% सब्सक्राइब, देश के सबसे बड़े जियो IPO की धमाकेदार ओपनिंग “हॉरर और कॉमेडी का मेल बहुत दिलचस्प होता है”: अक्षय कुमार भारत स्वस्तिक यात्रा की जम्मू स्थित रघुनाथ मंदिर में राम कथा में भगवान श्रीराम की विरासत और जम्मू-कश्मीर की आध्यात्मिक एकात्मता पर प्रकाश विद्या मालवडे की ‘स्कैम 2024’ खोलेगी डिजिटल अरेस्ट का डरावना सच जापान का ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन: मंगल के चंद्रमा फोबोस से धरती पर लाए जाएंगे नमूने

भारत-UAE के बीच ब्रह्मोस मिसाइल सौदे पर बातचीत, 'आकाशतीर' एयर डिफेंस सिस्टम में भी दिलचस्पी

👤
prativad
👁 936 व्यूज
📍 भोपाल
भारत-UAE के बीच ब्रह्मोस मिसाइल सौदे पर बातचीत, 'आकाशतीर' एयर डिफेंस सिस्टम में भी दिलचस्पी
23 जून 2026। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल की संभावित बिक्री को लेकर शुरुआती स्तर की बातचीत चल रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच भारत के स्वदेशी 'आकाशतीर' एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद पर भी चर्चा हो रही है।

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि भारत और UAE के बीच रक्षा सहयोग को लेकर बातचीत प्रारंभिक चरण में है, लेकिन यह तेजी से आगे बढ़ रही है।

भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में शामिल है। यह मिसाइल जमीन, समुद्र और हवा से दागी जा सकती है और लगभग मैक-3 की गति से लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। हाल के वर्षों में भारतीय सेना ने इसकी मारक क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया है।

वहीं, 'आकाशतीर' एक पूरी तरह स्वचालित एयर डिफेंस कमांड और कंट्रोल सिस्टम है, जिसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारतीय सेना ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह सिस्टम वायु रक्षा इकाइयों को रियल टाइम में जोड़कर तेज और सटीक प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात के लिए भारत को रूस की मंजूरी की आवश्यकता होगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मॉस्को और अबू धाबी के करीबी संबंधों को देखते हुए इस मंजूरी में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी।

मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के बाद UAE अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है। देश विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अपने जहाजों और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।

भारत का रक्षा निर्यात पिछले एक दशक में तेज़ी से बढ़ा है। वर्ष 2013-14 में जहां यह केवल 7.26 मिलियन डॉलर था, वहीं मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में यह बढ़कर 4 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया।

ब्रह्मोस का पहला विदेशी ग्राहक फिलीपींस था, जिसने 2022 में 375 मिलियन डॉलर का सौदा किया था। इसके अलावा भारत वियतनाम के साथ भी ब्रह्मोस को लेकर समझौता कर चुका है, जबकि इंडोनेशिया के साथ बातचीत जारी है।

इस बीच, ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने वित्त वर्ष 2025-26 में 48.6 प्रतिशत की रिकॉर्ड राजस्व वृद्धि दर्ज की है, जो वैश्विक रक्षा बाजार में भारतीय हथियार प्रणालियों की बढ़ती मांग को दर्शाती है।
Tags :