5 जुलाई 2026। भारत सरकार ने सशस्त्र बलों की युद्धक क्षमता को और मजबूत करने के उद्देश्य से लगभग 5.5 अरब डॉलर (करीब ₹46,000 करोड़) की नई रक्षा खरीद को मंजूरी दी है। यह फैसला सेना के आधुनिकीकरण अभियान के तहत लिया गया है। इससे पहले मार्च 2026 में भी सरकार लगभग 25 अरब डॉलर के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे चुकी थी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने विभिन्न रक्षा प्रणालियों की खरीद संबंधी प्रस्तावों को मंजूरी देते हुए कहा कि इनसे भारतीय सशस्त्र बलों की युद्ध की तैयारी और परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
खरीद में शामिल होंगे आधुनिक हथियार और रक्षा प्रणालियां
स्वीकृत खरीद प्रस्तावों में कई अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियां शामिल हैं, जिनमें:
'आकाश तरंग' एंटी-ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम
कंधे पर रखकर दागी जाने वाली एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें
मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम
वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS)
टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम
भारतीय सेना के लिए जेट आधारित कामिकेज़ ड्रोन सिस्टम
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि 'आकाश तरंग' प्रणाली युद्धक्षेत्र में तैनात सेना की टुकड़ियों को ड्रोन हमलों से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करेगी।
नौसेना और वायुसेना की क्षमता भी होगी मजबूत
DAC ने समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने के लिए नेवल माइन्स, जहाजों पर तैनात किए जाने वाले ड्रोन तथा उनसे जुड़ी टेस्टिंग फैसिलिटी की खरीद को भी मंजूरी दी है।
इसके अलावा भारतीय वायु सेना के लिए हाई-एल्टीट्यूड अनमैन्ड एयरक्राफ्ट प्लेटफॉर्म खरीदे जाएंगे, जिनका उपयोग खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और रिमोट सेंसिंग मिशनों में किया जाएगा।
रक्षा आधुनिकीकरण पर सरकार का जोर
भारत ने हाल के वर्षों में अपनी रक्षा तैयारियों को तेजी से मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है। पिछले वर्ष पाकिस्तान के साथ सीमित सैन्य तनाव के बाद सरकार ने रक्षा आधुनिकीकरण की गति बढ़ाई है।
वर्तमान में भारत का रक्षा बजट लगभग 85 अरब डॉलर है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 प्रतिशत अधिक है। वहीं, सेना के लिए 23 अरब डॉलर का पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) निर्धारित किया गया है, जिससे बड़े रक्षा खरीद कार्यक्रमों को वित्तीय सहायता मिलेगी।
भारत अब भी दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार, वर्ष 1950 से अब तक मूल्य के आधार पर भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है। हालांकि हाल के वर्षों में सरकार "आत्मनिर्भर भारत" अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन और घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दे रही है।














