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'मानस' बना नशे के खिलाफ डिजिटल हथियार, 1933 हेल्पलाइन से गोपनीय शिकायत और परामर्श की सुविधा

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 144

नई दिल्ली 2 जुलाई 2026। देश में बढ़ते मादक पदार्थों के दुरुपयोग और तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने तकनीक आधारित राष्ट्रीय मंच 'मानस' (मादक पदार्थ निषेध आसूचना केंद्र) विकसित किया है। गृह मंत्रालय के अधीन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी) के सहयोग से 18 जुलाई 2024 को इस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य नागरिकों को नशे से जुड़ी गतिविधियों की गोपनीय सूचना देने, परामर्श प्राप्त करने और पुनर्वास सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है।

सरकार के अनुसार, मादक पदार्थों का दुरुपयोग केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए 'मानस' को ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया गया है, जहां नागरिक बिना अपनी पहचान उजागर किए नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री, अवैध खेती और अन्य संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दे सकते हैं।

1933 हेल्पलाइन, वेब पोर्टल और उमंग ऐप से उपलब्ध सेवा
'मानस' की सेवाएं राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1933, आधिकारिक वेब पोर्टल, ई-मेल और उमंग ऐप के माध्यम से 24 घंटे उपलब्ध हैं। नशे की लत से जूझ रहे लोगों को परामर्श और पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराने के लिए उनकी कॉल सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन 14446 पर भी ट्रांसफर की जाती है।

डिजिटल टिकटिंग और वर्कफ्लो मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए शिकायतों को संबंधित एजेंसियों तक तेजी से पहुंचाया जाता है, जिससे कार्रवाई में तेजी और बेहतर समन्वय सुनिश्चित होता है। भविष्य में इस प्लेटफॉर्म पर बहुभाषी कॉल सपोर्ट, स्मार्ट आईवीआरएस, चैटबॉट और क्षेत्रीय भाषाओं में सहायता जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं।

देश में नशे की समस्या की तस्वीर
भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग पर वर्ष 2019 की राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार देश में लगभग 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं, जिनमें 5.7 करोड़ से अधिक लोग गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इसके अलावा 3.1 करोड़ लोग भांग, 2.26 करोड़ लोग ओपिओइड और लगभग 1.18 करोड़ लोग सेडेटिव दवाओं का सेवन करते हैं। यह आंकड़े नशे के खिलाफ व्यापक सामाजिक और संस्थागत प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

नागरिकों की भागीदारी से मजबूत हो रहा अभियान
सरकार का कहना है कि 'मानस' ने नागरिकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया को अधिक सरल और सुरक्षित बनाया है। इससे मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को मजबूती मिली है। साथ ही देशभर में काउंसलिंग, पुनर्वास और जन-जागरूकता सेवाओं तक लोगों की पहुंच भी बढ़ी है।

ऑनलाइन जागरूकता अभियानों के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं को नशा विरोधी अभियान से जोड़ा जा रहा है। प्लेटफॉर्म की पूरी तरह डिजिटल कार्यप्रणाली विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और पारदर्शी सेवा वितरण सुनिश्चित कर रही है।

डिजिटल इंडिया मिशन को मिल रही मजबूती
'मानस' को डिजिटल इंडिया मिशन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को सीधे एनसीबी की 30 क्षेत्रीय इकाइयों और 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) से जोड़ता है।

सभी शिकायतें डिजिटल रूप से दर्ज, ट्रैक और निस्तारित की जाती हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ती है। इसके अलावा डिजिटल डेटा के विश्लेषण से नशे से जुड़े नए रुझानों और प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर रणनीति तैयार करने में भी मदद मिल रही है।

नशा मुक्त भारत की दिशा में अहम कदम
सरकार का मानना है कि 'मानस' केवल एक हेल्पलाइन नहीं बल्कि तकनीक आधारित नागरिक सहभागिता का ऐसा मंच है, जो सुरक्षित रिपोर्टिंग, डेटा विश्लेषण, परामर्श और पुनर्वास सेवाओं को एक साथ जोड़ता है। जैसे-जैसे इसकी पहुंच और सुविधाएं बढ़ रही हैं, यह प्लेटफॉर्म 'नशा मुक्त भारत' अभियान को मजबूत करने के साथ डिजिटल सुशासन का भी प्रभावी मॉडल बनता जा रहा है।

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