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आईएनसीओआईएस ने शुरू किया विशेष अल नीनो बुलेटिन, समुद्री क्षेत्रों के लिए जारी की चेतावनी

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📍 भोपाल
आईएनसीओआईएस ने शुरू किया विशेष अल नीनो बुलेटिन, समुद्री क्षेत्रों के लिए जारी की चेतावनी
24 जून 2026। भारत के समुद्री क्षेत्रों पर अल नीनो के संभावित प्रभावों को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) ने विशेष अल नीनो बुलेटिन जारी करना शुरू कर दिया है। चेवेल्ला लोकसभा क्षेत्र के सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने 22 जून 2026 को आईएनसीओआईएस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पहला विशेष बुलेटिन जारी किया।

पहले बुलेटिन में चेतावनी दी गई है कि अल नीनो की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है और इसके नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच चरम पर पहुंचने की संभावना है। इसके चलते अप्रैल-मई 2027 तक हिंद महासागर का समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।

आईएनसीओआईएस के अनुसार, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी समेत उत्तरी हिंद महासागर के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर आने वाले महीनों में, विशेषकर मार्च से मई 2027 के दौरान, गंभीर ऊष्मीय दबाव पड़ सकता है। इससे प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ) के विरंजन, समुद्री तापप्रसव (मरीन हीटवेव) की घटनाओं और मछली उत्पादन में गिरावट की आशंका है। विशेष रूप से सार्डिन और मैकेरल जैसी मछली प्रजातियां अपने अनुकूल आवास की ओर पलायन कर सकती हैं या उनके प्रजनन पर असर पड़ सकता है। बदलती समुद्री परिस्थितियों के कारण मछलियों के आकार और वृद्धि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना जताई गई है।

बुलेटिन में कहा गया है कि मौजूदा मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी में समुद्री परिस्थितियां अधिक अशांत रह सकती हैं, जिससे भारत के पूर्वी तट पर तटीय कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ेगा। इसके विपरीत, अरब सागर और पश्चिमी तट पर समुद्र अपेक्षाकृत शांत रहने की संभावना है, जिससे समुद्री गतिविधियों और परिचालन के लिए बेहतर अवसर मिल सकते हैं। पश्चिमी तट पर तटीय कटाव और जलभराव की घटनाओं में भी कमी आने का अनुमान है।

आईएनसीओआईएस ने मछुआरों, समुद्री उद्योगों और अन्य समुद्री संचालकों को समय-समय पर जारी होने वाले अलर्ट, चेतावनियों और सलाहों पर करीबी नजर रखने की सलाह दी है। संस्थान ने बताया कि अगला विशेष अल नीनो बुलेटिन जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में जारी किया जाएगा।
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