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भारतीय रेल की पहली हाइड्रोजन ट्रेन पटरी पर, हरित परिवहन की नई शुरुआत

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 96

नई दिल्ली 16 जुलाई 2026। भारतीय रेल ने हरित परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया है। 17 जुलाई से हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर शुरू हुई यह सेवा भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करती है, जहां हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित रेल परिवहन उपलब्ध है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर रेलवे तकनीक के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है।

यह ट्रेन पूरी तरह भारत में विकसित की गई है और इसे अनुसंधान, डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) की तकनीकी विशिष्टताओं के अनुरूप तैयार किया गया है। परियोजना का उद्देश्य रेल परिवहन में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और कार्बन उत्सर्जन घटाना है। यह पहल राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के अनुरूप मानी जा रही है।

स्वदेशी तकनीक से तैयार हुई ट्रेन
भारतीय रेल की यह 10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन 1200 किलोवाट क्षमता वाले प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल सिस्टम से संचालित होती है। इसकी डिजाइन गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि परिचालन के लिए 75 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति निर्धारित की गई है। ट्रेन में लगभग 2,600 यात्रियों के सफर की क्षमता है।

यह सेवा जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत के बीच चलेगी तथा मार्ग के सभी प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी।

डीजल का स्वच्छ विकल्प
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में हाइड्रोजन और वातावरण से प्राप्त ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से बिजली उत्पन्न की जाती है। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन नहीं होता। उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प और गर्मी निकलती है, जिससे यह तकनीक पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल मानी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोजन की ऊर्जा घनत्व डीजल की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक होती है। यही कारण है कि भविष्य में इसे रेल, सड़क और अन्य परिवहन प्रणालियों के लिए स्वच्छ ईंधन के रूप में देखा जा रहा है।

जींद में तैयार हुआ अत्याधुनिक हाइड्रोजन स्टेशन
इस परियोजना के लिए हरियाणा के जींद में भारतीय रेल का सबसे बड़ा हाइड्रोजन भंडारण एवं ईंधन भरने का केंद्र स्थापित किया गया है। यहां एक बार में लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन सुरक्षित रूप से संग्रहित की जा सकती है। पूरी प्रणाली अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित की गई है तथा इसकी स्वतंत्र सुरक्षा जांच जर्मनी की TÜV SÜD एजेंसी द्वारा की गई है।

सुरक्षा को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता
रेल मंत्रालय के अनुसार हाइड्रोजन ट्रेन में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। ट्रेन और ईंधन स्टेशन दोनों पर हाइड्रोजन रिसाव डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम और स्वचालित गैस सप्लाई कट-ऑफ जैसी आधुनिक सुविधाएं लगाई गई हैं। शुरुआती संचालन के दौरान प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञ भी ट्रेन के साथ मौजूद रहेंगे, जबकि दिल्ली के शकूरबस्ती में इसके रखरखाव के लिए विशेष सुविधा विकसित की गई है।

भविष्य की रेल व्यवस्था की झलक
भारतीय रेल का मानना है कि यह परियोजना केवल एक नई ट्रेन शुरू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के हरित और टिकाऊ रेल नेटवर्क की नींव है। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेलखंडों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है।

हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक भारत को ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी तकनीकी विकास के क्षेत्र में नई मजबूती देने के साथ-साथ वैश्विक हरित परिवहन व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण स्थान दिला सकती है।

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