1 जून 2026। भारत ने वियतनाम को सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इंडोनेशिया के साथ भी इसी तरह का सौदा अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान राजेश कुमार सिंह ने बताया कि वियतनाम और इंडोनेशिया दोनों के साथ ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वियतनाम के साथ समझौते पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं, हालांकि इसकी औपचारिक सार्वजनिक घोषणा अभी नहीं की गई है।
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने हाल ही में भारत का दौरा किया था। इस समझौते के साथ वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा देश बन गया है जिसने अपने रक्षा बेड़े में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को शामिल किया है। इससे पहले फिलीपींस 375 मिलियन डॉलर के समझौते के तहत ब्रह्मोस प्रणाली खरीदने वाला पहला विदेशी ग्राहक बना था और उसे अप्रैल में मिसाइलों की पहली खेप प्राप्त हुई थी।
ब्रह्मोस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नामों को मिलाकर रखा गया है। यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इसका विकास भारत के DRDO और रूस के NPO माशिनोस्ट्रोयेनिया ने संयुक्त रूप से किया है।
शुरुआत में ब्रह्मोस की मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर थी, लेकिन बाद में इसे लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम बनाने के लिए अपग्रेड किया गया। इसकी बढ़ी हुई क्षमता और बहु-प्लेटफॉर्म लॉन्च प्रणाली ने इसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के लिए आकर्षक रक्षा विकल्प बना दिया है।
ब्रह्मोस को युद्धपोतों, पनडुब्बियों, जमीन आधारित लॉन्चरों और लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है। इसे पहली बार वर्ष 2001 में मॉस्को के MAKS एयर शो में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया था।
रिपोर्टों के अनुसार, भारत और रूस के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस की इंडोनेशिया के साथ 200 से 350 मिलियन डॉलर के संभावित सौदे पर उन्नत स्तर की बातचीत चल रही है। इंडोनेशियाई अधिकारियों ने भी सुपरसोनिक मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए प्रारंभिक ढांचे को अंतिम रूप देने की पुष्टि की है।
इस बीच, ब्रह्मोस परियोजना के अगले चरण में रूस की हाइपरसोनिक ज़िरकॉन मिसाइल तकनीक पर आधारित नई पीढ़ी की मिसाइल प्रणाली के संयुक्त विकास की संभावना पर भी काम किया जा रहा है।
DRDO के अनुसार, ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने पिछले वित्तीय वर्ष में रिकॉर्ड राजस्व हासिल किया है, जो वैश्विक रक्षा बाजार में इसकी बढ़ती मांग को दर्शाता है।















