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भारत पर हमलों में यूरोपीय हथियारों का इस्तेमाल, नैतिकता का पाठ न पढ़ाए पश्चिम: जयशंकर

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📍 भोपाल
भारत पर हमलों में यूरोपीय हथियारों का इस्तेमाल, नैतिकता का पाठ न पढ़ाए पश्चिम: जयशंकर
नई दिल्ली 12 जून 2026। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय देशों पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि पश्चिमी देशों को भारत की विदेश नीति पर नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले अपने रुख की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों से भारत पर हुए हमलों में यूरोपीय हथियारों का इस्तेमाल होता रहा है, जबकि भारत ने कभी भी यूरोप की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा नहीं किया।

फिनलैंड की आधिकारिक यात्रा के दौरान यूक्रेन संघर्ष और रूस से तेल खरीद को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेता है। उन्होंने कहा कि 2022 के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में उपलब्ध अधिकांश अतिरिक्त तेल रूस से आ रहा था, जबकि यूरोपीय देश मध्य-पूर्वी आपूर्ति की ओर अधिक झुके हुए थे, जो भारत के पारंपरिक आपूर्तिकर्ता रहे हैं।

विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं किया गया है, लेकिन भारत के संदर्भ में यूरोपीय हथियारों के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार, यूरोप लंबे समय से ऐसे देशों को हथियार बेचता रहा है जिनका उपयोग भारत के खिलाफ किया गया है।

रूसी तेल आयात के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि भारत तब रूस से अधिक तेल खरीदने लगा जब मॉस्को पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए गए। उन्होंने दावा किया कि उस समय अमेरिका ने स्वयं भारत से वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए रूसी तेल खरीद जारी रखने का आग्रह किया था।

उन्होंने अमेरिकी नीति में बदलाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि पहले रूसी तेल खरीदने पर भारत के खिलाफ दंडात्मक शुल्क लगाए गए, लेकिन बाद में प्रतिबंधों में ढील भी दी गई। ऐसे में इस मुद्दे को नैतिकता के चश्मे से देखना उचित नहीं है।

जयशंकर ने कहा कि वैश्विक राजनीति में राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लिए जाते हैं और आज कई पश्चिमी देश भी "रणनीतिक स्वायत्तता" (Strategic Autonomy) की अवधारणा को अपना रहे हैं, जिसका भारत लंबे समय से समर्थन करता रहा है।

विदेश मंत्री के इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, रूस-यूक्रेन युद्ध और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर दुनिया भर में नई रणनीतियां आकार ले रही हैं।
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