17 जून 2026। टेलीग्राम के संस्थापक और सीईओ पावेल डुरोव ने भारत में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर रिलायंस और वॉट्सऐप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डुरोव का दावा है कि भारत में टेलीग्राम की पहुंच प्रभावित करने और प्लेटफॉर्म के खिलाफ माहौल बनाने के लिए कथित तौर पर लॉबिंग की गई।
यह विवाद उस समय सामने आया जब टेलीग्राम ने भारत सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। सरकार ने यह प्रतिबंध 21 जून को आयोजित होने वाली NEET-UG 2026 परीक्षा से पहले लगाया था।
मंगलवार को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में डुरोव ने आरोप लगाया कि भारतीय दूरसंचार कंपनी रिलायंस कथित रूप से BGP हाइजैकिंग जैसी तकनीकों के माध्यम से भारत के बाहर, विशेष रूप से UAE सहित कई क्षेत्रों में टेलीग्राम की सेवाओं को बाधित कर रही है। उन्होंने इसे प्रतिस्पर्धात्मक कारणों से की गई कार्रवाई बताया।
डुरोव ने यह भी दावा किया कि रिलायंस और मेटा के बीच कारोबारी संबंधों को देखते हुए यह कदम प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने का प्रयास हो सकता है। उल्लेखनीय है कि मेटा, वॉट्सऐप की मूल कंपनी है और उसकी जियो प्लेटफॉर्म्स में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
हालांकि, डुरोव द्वारा साझा किए गए कथित तकनीकी साक्ष्यों में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के बजाय रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) का नाम दिखाई दिया। रिलायंस कम्युनिकेशंस, अनिल अंबानी समूह की कंपनी रही है, जबकि जियो और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का संचालन मुकेश अंबानी के नेतृत्व में होता है। इस तथ्य की ओर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने भी ध्यान दिलाया।
भारत सरकार ने यह प्रतिबंध नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर लगाया है। NTA का कहना है कि यह कदम परीक्षा से जुड़ी अफवाहों, फर्जी प्रश्नपत्रों और कथित पेपर लीक से संबंधित भ्रामक सूचनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है।
गौरतलब है कि मई 2026 में आयोजित NEET-UG परीक्षा को कथित प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। अब पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। सरकार ने टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी रोक लगाने के साथ-साथ प्लेटफॉर्म को 30 जून तक अपने मैसेज-एडिटिंग फीचर को निष्क्रिय रखने का निर्देश भी दिया है।
NTA का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य उन संगठित समूहों की गतिविधियों पर रोक लगाना है जो सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से परीक्षा से संबंधित भ्रामक जानकारी फैलाकर अभ्यर्थियों को गुमराह कर सकते हैं।
फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज़, मेटा और रिलायंस कम्युनिकेशंस ने डुरोव के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इस मामले ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक यह मांग कर रहे हैं कि ध्यान तकनीकी विवादों के बजाय परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने पर केंद्रित किया जाए।

















