×

मैक 3 से आगे की उड़ान: भारत-रूस विकसित कर रहे हैं नई हाइपरसोनिक ब्रह्मोस

News from Bhopal, Madhya Pradesh News, Heritage, Culture, Farmers, Community News, Awareness, Charity, Climate change, Welfare, NGO, Startup, Economy, Finance, Business summit, Investments, News photo, Breaking news, Exclusive image, Latest update, Coverage, Event highlight, Politics, Election, Politician, Campaign, Government, prativad news photo, top news photo, प्रतिवाद, समाचार, हिन्दी समाचार, फोटो समाचार, फोटो
Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 133

18 जून 2026। भारत और रूस संयुक्त रूप से ब्रह्मोस मिसाइल के अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक संस्करण पर काम कर रहे हैं। रूस के भारत स्थित राजदूत डेनिस अलीपोव ने ब्रह्मोस मिसाइल के पहले परीक्षण प्रक्षेपण की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सुपरसोनिक ब्रह्मोस के साथ-साथ इसके छोटे और अधिक तेज़ हाइपरसोनिक संस्करणों का विकास जारी है, जो भारतीय सशस्त्र बलों की बहु-आयामी स्ट्राइक क्षमताओं को और मजबूत करेंगे।

अलीपोव ने ब्रह्मोस परियोजना को भारत-रूस रक्षा सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि यह केवल हथियारों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक साझा करने, संयुक्त विकास और सह-उत्पादन पर आधारित साझेदारी का प्रतीक है।

ब्रह्मपुत्र और मॉस्कवा नदियों के नाम पर आधारित ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में गिनी जाती है। इसकी अधिकतम गति मैक 3 तक पहुंचती है, जो ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक है। वर्तमान में यह मिसाइल भूमि, समुद्र और वायु तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जा सकती है।

रूसी राजदूत ने पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में ब्रह्मोस मिसाइलों की सटीकता और प्रभावशीलता का प्रदर्शन हुआ, जिससे पाकिस्तान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा।

अलीपोव के अनुसार, ब्रह्मोस संयुक्त उद्यम ने दोनों देशों के रक्षा संबंधों को नई दिशा दी है। इसी मॉडल ने भारत में Su-30MKI लड़ाकू विमानों और T-90 मुख्य युद्धक टैंकों के लाइसेंस प्राप्त स्थानीय उत्पादन जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि रूस के Su-57 प्लेटफॉर्म पर आधारित पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के संयुक्त विकास तथा S-400 वायु रक्षा प्रणाली के उत्पादन जैसे प्रस्ताव भी द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और आगे बढ़ा सकते हैं।

राजदूत ने भारत में इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित AK-203 असॉल्ट राइफलों का भी उल्लेख किया, जिन्हें दोनों देशों के रक्षा सहयोग की एक और सफलता माना जा रहा है।

इस बीच, ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रबंध निदेशक अलेक्जेंडर मक्सिचेव ने हाल ही में कहा कि कंपनी रूसी नौसेना और थल सेना को भी ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति के लिए तैयार है।

ब्रह्मोस मिसाइल की शुरुआती मारक क्षमता 290 किलोमीटर तक सीमित थी, लेकिन बाद में इसे लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम बनाने के लिए उन्नत किया गया। फिलीपींस 2022 में 375 मिलियन डॉलर के सौदे के साथ इसका पहला विदेशी ग्राहक बना था। मिसाइलों की पहली खेप अप्रैल 2024 और दूसरी खेप अप्रैल 2025 में फिलीपींस को सौंपी गई थी।

भारत ने हाल ही में वियतनाम के साथ भी ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति संबंधी समझौते की पुष्टि की है। बढ़ती वैश्विक मांग के बीच ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने वित्त वर्ष 2025-26 में 48.6 प्रतिशत की रिकॉर्ड राजस्व वृद्धि दर्ज की है, जो इस संयुक्त रक्षा परियोजना की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय सफलता को दर्शाती है।

Related News

Global News