×

डिजिटल जासूसी का खेल: CCTV नेटवर्क से खामेनेई की सुरक्षा और रूटीन का डेटा कैसे किया गया हैक

News from Bhopal, Madhya Pradesh News, Heritage, Culture, Farmers, Community News, Awareness, Charity, Climate change, Welfare, NGO, Startup, Economy, Finance, Business summit, Investments, News photo, Breaking news, Exclusive image, Latest update, Coverage, Event highlight, Politics, Election, Politician, Campaign, Government, prativad news photo, top news photo, प्रतिवाद, समाचार, हिन्दी समाचार, फोटो समाचार, फोटो
Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 248

7 मार्च 2026। ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की हत्या से जुड़ी एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इज़राइल ने कई सालों तक ईरान के ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क को हैक कर उनकी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी की। बताया जा रहा है कि यह निगरानी साइबर घुसपैठ, ह्यूमन इंटेलिजेंस और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स से जुड़े एक बड़े ऑपरेशन का हिस्सा थी।

ब्रिटिश अखबार Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरे लंबे समय तक हैक किए गए थे। इन कैमरों की फुटेज को एन्क्रिप्ट कर इज़राइल के Tel Aviv और दक्षिणी इज़राइल में स्थित सर्वरों तक भेजा जाता था।

एक मौजूदा इज़राइली इंटेलिजेंस अधिकारी ने अखबार को बताया, “हम तेहरान को उतना ही अच्छी तरह जानते थे जितना यरुशलम को।”
उसके मुताबिक, शहर की गतिविधियों को करीब से समझने से अधिकारियों की दिनचर्या में होने वाले छोटे-से-छोटे बदलाव भी पकड़ में आ जाते थे।

CCTV से बनी अधिकारियों की ‘लाइफ पैटर्न’ प्रोफाइल
रिपोर्ट के अनुसार, एक खास कैमरे से यह जानकारी मिली कि वरिष्ठ अधिकारियों के बॉडीगार्ड और ड्राइवर अपनी निजी कारें कहाँ पार्क करते हैं। इससे उनके रोज़मर्रा के रूट और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत प्रोफाइल तैयार की गई।

तेहरान की अहम सड़क पाश्चर स्ट्रीट पर स्थित एक हाई-सिक्योरिटी कंपाउंड के बाहर लगातार निगरानी से “लाइफ पैटर्न” तैयार किया गया। इसी इलाके में शनिवार को खामेनेई की हत्या हुई बताई जाती है।

साइबर यूनिट और मानव स्रोतों का इस्तेमाल
डेटा जुटाने के लिए इज़राइल की मिलिट्री साइबर यूनिट Unit 8200, विदेशी खुफिया एजेंसी Mossad के मानव स्रोतों और सैन्य खुफिया एजेंसियों से आने वाली कई इंटेलिजेंस स्ट्रीम का इस्तेमाल किया गया।

सालों में जुटाए गए डेटा को बाद में उन्नत एल्गोरिद्म से विश्लेषित किया गया। इसमें सुरक्षा कर्मियों के पते, ड्यूटी शेड्यूल, आने-जाने के रास्ते और वे आमतौर पर किन अधिकारियों की सुरक्षा करते हैं जैसी जानकारी शामिल थी।

हमले के दिन मोबाइल नेटवर्क भी बाधित
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हमले के दिन इज़राइल ने कंपाउंड के पास मौजूद लगभग एक दर्जन मोबाइल टावरों को आंशिक रूप से बाधित कर दिया था। इससे कॉल करने पर फोन लगातार व्यस्त दिख रहे थे और सुरक्षा टीम को समय पर चेतावनी नहीं मिल सकी।

रियल-टाइम डेटा के जरिए इज़राइली खुफिया एजेंसियों और अमेरिकी एजेंसी Central Intelligence Agency को यह भी पता चला कि शनिवार सुबह खामेनेई अपने कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। इसे हमले के लिए “असामान्य रूप से सटीक मौका” माना गया।

इज़राइल के कैमरे भी हुए हैं हैक
साइबर जासूसी का यह खेल एकतरफा नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान भी इज़राइल में प्राइवेट सिक्योरिटी कैमरों को हैक कर रियल-टाइम जानकारी जुटाता रहा है।

इज़राइल नेशनल साइबर डायरेक्टरेट के पूर्व प्रमुख Gaby Portnoy ने पहले चेतावनी दी थी कि कमजोर पासवर्ड, पुराने फर्मवेयर और खराब इंस्टॉलेशन के कारण हजारों पब्लिक और प्राइवेट कैमरे हैकिंग के खतरे में रहते हैं।

एक साइबर सिक्योरिटी रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में हजारों CCTV कैमरे बिना पासवर्ड या सुरक्षा के इंटरनेट पर लाइव स्ट्रीम करते हैं, जिन्हें कोई भी एक्सेस कर सकता है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और मिसाइल जितने महत्वपूर्ण हो गए हैं, उतना ही अहम अब डेटा और निगरानी नेटवर्क भी बन चुके हैं।

Related News

Latest News

Global News