🔴 TRENDING NOW!
भोपाल की काली बाड़ी में दुर्गा पूजा का 70वां वर्ष, सुनहरी प्रतिमा और प्रकृति थीम बनी आकर्षण इंदौर अर्बन कॉन्क्लेव-2026: सीएम डॉ. मोहन का फोकस शहरों के भविष्य पर, जानें कैसे बदलेगी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की तस्वीर राज्य सरकार ओबीसी हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारत में Tesla Roadster की बुकिंग शुरू, ₹5.01 लाख से करना होगा भुगतान, जानें पूरी कीमत बिजनेस मीटिंग से ग्लोबल समिट तक, MICE पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा मध्यप्रदेश भारत स्वस्तिक यात्रा का झाँसी पड़ाव: मोरारी बापू ने कहा, स्वस्तिक का केंद्र बिंदु परब्रह्म परमात्मा हैं, जिनका नाम राम है पासवर्ड था ‘123456’, खतरे में पड़ गई 88 लाख लोगों की पहचान! डीपी वर्ल्ड भारत में दिव्यांग लोगों के लिए गोल्फ के नए अवसर उपलब्ध कराएगा भारत स्वस्तिक यात्रा की ओंकारेश्वर में रामकथा ने आदि शंकराचार्य की आध्यात्मिक विरासत को किया रेखांकित भोपाल में इलेक्रामा रोड शो, भारत के ऊर्जा भविष्य को मजबूत बनाने में क्षेत्रीय उद्योगों की भूमिका पर जोर

Google का नया CAPTCHA विवादों में, अब कैमरे के सामने हाथ हिलाकर साबित करनी होगी इंसान होने की पहचान

👤
prativad
👁 1241 व्यूज
📍 भोपाल
Google का नया CAPTCHA विवादों में, अब कैमरे के सामने हाथ हिलाकर साबित करनी होगी इंसान होने की पहचान
17 जून 2026। Google अपने reCAPTCHA सिस्टम के लिए एक नए वेरिफिकेशन मॉडल का परीक्षण कर रहा है, जिसमें कुछ यूज़र्स को कैमरा एक्सेस देकर हाथ के इशारों के माध्यम से यह साबित करना होगा कि वे इंसान हैं, कोई AI बॉट नहीं। हालांकि कंपनी का दावा है कि यह तकनीक ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करेगी, लेकिन इसे लेकर प्राइवेसी और निगरानी संबंधी चिंताएं भी सामने आने लगी हैं।

Google के अनुसार, यह नया सिस्टम यूज़र के हाथ की हलचल का एक छोटा वीडियो रिकॉर्ड कर उसका विश्लेषण करता है। प्रक्रिया के दौरान हाथ के 21 प्रमुख लैंडमार्क पॉइंट्स की पहचान की जाती है, जिनकी मदद से यह निर्धारित किया जाता है कि सामने वास्तविक व्यक्ति है या कोई स्वचालित बॉट।

कंपनी का कहना है कि इस प्रक्रिया में ऑडियो रिकॉर्ड नहीं किया जाता, वीडियो किसी व्यक्ति की पहचान से नहीं जोड़ा जाता और सत्यापन पूरा होने के बाद फुटेज स्वतः हटा दिया जाता है।

AI बॉट्स से निपटने की नई रणनीति
Google का यह कदम ऐसे समय में आया है जब AI-संचालित बॉट्स पारंपरिक CAPTCHA सिस्टम को तेजी से चुनौती दे रहे हैं। अब तक इस्तेमाल होने वाले CAPTCHA में यूज़र्स को ट्रैफिक लाइट, सीढ़ियां, फायर ट्रक या साइकिल जैसी वस्तुओं की पहचान करनी पड़ती थी, लेकिन उन्नत AI मॉडल इन परीक्षणों को भी पार करने लगे हैं।

Google का दावा है कि नया जेस्चर-आधारित सिस्टम बेहतर "लाइवनेस डिटेक्शन" प्रदान करता है, जिससे फर्जी अकाउंट निर्माण, क्रेडेंशियल-स्टफिंग हमलों और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी गतिविधियों को रोकने में मदद मिलेगी।

प्राइवेसी को लेकर उठे सवाल
नई तकनीक को लेकर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूज़र्स का मानना है कि साधारण "मैं रोबोट नहीं हूं" सत्यापन के लिए कैमरे का उपयोग अनावश्यक है और यह ऑनलाइन बायोमेट्रिक निगरानी को बढ़ावा दे सकता है।

कुछ आलोचकों का कहना है कि इमेज-आधारित CAPTCHA की तुलना में कैमरा आधारित सत्यापन अधिक हस्तक्षेपकारी है। वहीं कुछ तकनीकी विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या यह प्रणाली वास्तव में AI द्वारा धोखा दिए जाने से सुरक्षित रहेगी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुछ यूज़र्स ने दावा किया कि वर्चुअल कैमरा और AI-जनरेटेड एनिमेशन की मदद से इस तरह के परीक्षणों को भी बायपास किया जा सकता है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जेस्चर रिकग्निशन पर बढ़ रहा Google का फोकस
हाथ के इशारों को पहचानने वाली तकनीक Google के लिए नई नहीं है। वर्ष 2023 में Google Meet में ऐसा फीचर जोड़ा गया था, जिसके माध्यम से यूज़र वेबकैम के सामने हाथ उठाकर वर्चुअल "हैंड रेज़" सिग्नल दे सकते थे।

इसके अलावा, हाल ही में सामने आई एक पेटेंट आवेदन में Google द्वारा ऐसी तकनीक पर काम करने का संकेत मिला है, जो पहनने योग्य उपकरणों में ध्वनिक संकेतों के जरिए हाथ और मांसपेशियों की गतिविधियों को पहचान सके। भविष्य में इससे कैमरा या वॉयस कमांड के बिना भी डिवाइस नियंत्रित किए जा सकेंगे।

सुरक्षा बनाम निजता की बहस
Google का नया CAPTCHA सिस्टम ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि कैमरा-आधारित सत्यापन को लेकर निजता और डेटा सुरक्षा की बहस आने वाले समय में और तेज हो सकती है। अब देखना होगा कि यूज़र्स इस तकनीक को स्वीकार करते हैं या पारंपरिक CAPTCHA तरीकों को ही अधिक भरोसेमंद मानते हैं।
Tags :