1 जून 2026। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर दायर एक अहम मुकदमे में Meta, TikTok, Snapchat और YouTube की मूल कंपनियों ने लाखों डॉलर के समझौते पर सहमति जताई है। हालांकि इन कंपनियों ने किसी भी प्रकार की कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला अमेरिका के केंटकी राज्य के Breathitt County School District द्वारा दायर किया गया था। स्कूल डिस्ट्रिक्ट का आरोप था कि सोशल मीडिया कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया है कि युवा उपयोगकर्ता लंबे समय तक उनसे जुड़े रहें, जिससे चिंता, अवसाद और आत्म-हानि जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं।
समझौते के तहत Instagram, Facebook और WhatsApp की मूल कंपनी Meta Platforms करीब 9 मिलियन डॉलर का भुगतान करेगी। वहीं Snapchat की मूल कंपनी Snap Inc और TikTok की पैरेंट कंपनी ByteDance पहले ही 8-8 मिलियन डॉलर देने पर सहमत हो चुकी हैं। YouTube की मूल कंपनी Alphabet 2 मिलियन डॉलर से अधिक का भुगतान करेगी।
स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने शुरुआत में 60 मिलियन डॉलर से ज्यादा के हर्जाने की मांग की थी। मुकदमे में दावा किया गया था कि कंपनियों ने जानबूझकर ऐसे फीचर्स विकसित किए, जो किशोरों में सोशल मीडिया की लत बढ़ाते हैं और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
समझौते की शर्तों के अनुसार किसी भी कंपनी को अपनी गलती स्वीकार नहीं करनी होगी। कंपनियों का कहना है कि वे युवा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और सोशल मीडिया के संभावित दुष्प्रभावों को कम करने के लिए लगातार कदम उठा रही हैं।
देशभर में हजारों मुकदमे लंबित
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में लगभग 1,200 स्कूल डिस्ट्रिक्ट सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ इसी तरह के मुकदमे दायर कर चुके हैं। इन मामलों को अन्य राज्यों, नगर निकायों और व्यक्तिगत वादियों द्वारा दायर मुकदमों के साथ कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में एकीकृत किया गया है। इसके अलावा राज्य स्तरीय अदालतों में 3,300 से अधिक मामले अभी भी लंबित हैं।
पहले भी लगा था भारी जुर्माना
मार्च में कैलिफोर्निया की एक जूरी ने एक 20 वर्षीय महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए Meta पर 4.2 मिलियन डॉलर और Google पर 1.8 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया था। महिला का आरोप था कि बचपन में YouTube और Instagram की "इनफिनिट स्क्रॉलिंग" जैसी विशेषताओं के कारण उसे सोशल मीडिया की लत लग गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ चल रहे व्यापक कानूनी संघर्ष में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और भविष्य में ऐसे मामलों की दिशा तय कर सकता है।















