7 जुलाई 2017, राज्य सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिये एक नया प्रावधान कर दिया है। उसने वेतन भुगतान संशोधन अधिनियम 2017 के तहत प्रदेश में स्थित कारखानों एवं उसके ठेकेदारों के लिये यह अनिवार्य कर दिया है कि वह अपने यहां काम करने वाले कर्मियों के वेतन का भुगतान चेक द्वारा अथवा उनके बैंक खाते में जमा द्वारा ही कर सकेंगे।
इसके लिये राज्य के श्रम विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। उल्लेखनीय है कि देश में वेतन भुगतान कानून 81 साल पहले वर्ष 1936 में बना था। इसमें केंद्र कीह नरेंद्र मोदी सरकार ने इस साल संशोधन कर दिया तथा अब इसे सभी राज्य सरकारों को लागू करना है। मप्र सरकार ने इसकी शुरुआत करते हुये वेतन भुगतान चेक या बैंक खाते में जमा द्वारा किये जाने का प्रावधान कर दिया है। इससे अब कारखानों एवं ठेकेदारों के द्वारा यहां काम करने वाले कर्मियों को कैश पेमेंट नहीं होगा तथा उन्हें चेक या बैंक खातों के माध्यम से वेतन भुगतान होगा। इससे वेतन भुगतान न होने संबंधी गड़बड़ी भी नहीं होगी तथा सारा रिकार्ड बैंक के माध्यम से सरकार को पता चल जायेगा।
श्रम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हमने सिर्फ कारखानों एवं उनके ठेकेदारों के लिये वेतन भुगतान चेक या बैंक खातों के माध्यम से करने का प्रावधान किया है लेकिन अन्य स्थानों पर यह भुगतान दिहाड़ी मजदूरों को नकदी में भी हो सकेगा।
- डॉ नवीन जोशी
मध्य प्रदेश में अब कारखानों और ठेकेदारों को वेतन, भुगतान चेक या बैंक खाते में जमा करके होगा
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