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IAF की नजर ‘सुपर सुखोई’ अपग्रेड पर, Su-57 डील के बीच तेज हुई रूस से बातचीत

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📍 भोपाल
IAF की नजर ‘सुपर सुखोई’ अपग्रेड पर, Su-57 डील के बीच तेज हुई रूस से बातचीत
25 फरवरी 2026। भारतीय वायुसेना अपने Su-30MKI फाइटर जेट्स के बड़े पैमाने पर अपग्रेड की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब नई दिल्ली रूस से पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर Su-57 की संभावित खरीद और उत्पादन को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ा रही है।

The New Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना रूस की मदद से अपने Su-30MKI बेड़े के एक हिस्से को “सुपर सुखोई” कॉन्फिगरेशन में अपग्रेड करना चाहती है। यह प्रस्ताव फिलहाल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

84 विमान पहले चरण में
रिपोर्ट के अनुसार अपग्रेड योजना फिलहाल 84 विमानों तक सीमित है। जबकि वायुसेना के पास करीब 175 अन्य Su-30MKI विमान भी हैं, जिनके लिए अलग अपग्रेड मॉडल पर विचार चल रहा है। चिंता यह है कि यदि पूरी तरह घरेलू प्रक्रिया पर निर्भर रहा जाए तो अपग्रेड अगले दशक तक खिंच सकता है।

हाल ही में रूस का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल Hindustan Aeronautics Limited की उस यूनिट का दौरा कर चुका है, जहां रूस के लाइसेंस के तहत Su-30MKI का निर्माण होता है। माना जा रहा है कि इस समन्वय का मकसद लोकल अपग्रेड प्रक्रिया में लगने वाला समय घटाना है, क्योंकि HAL के माध्यम से पूर्ण अपग्रेड में आमतौर पर सात साल तक लग जाते हैं।

Su-57 पर भी बातचीत तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बीच रूस के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर Sukhoi Su-57 को लेकर भी बातचीत तेज बताई जा रही है। रूस की United Aircraft Corporation के CEO वादिम बडेखा ने जनवरी में कहा था कि भारत में Su-57 के उत्पादन को लेकर बातचीत एडवांस स्टेज में है। प्रस्ताव यह है कि जिन सुविधाओं में अभी Su-30MKI बनते हैं, वहीं भविष्य में Su-57 का निर्माण हो सकता है।

रूस ने 2025 के दुबई एयरशो में भारत को Su-57 के पूर्ण लाइसेंस प्रोडक्शन और बिना शर्त टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पेशकश की थी। इसे एक ऐसा ऑफर माना जा रहा है, जो किसी पश्चिमी रक्षा साझेदार ने अब तक नहीं दिया।

रणनीतिक संतुलन की चुनौती
Su-30MKI, रूसी Su-30 का भारतीय संस्करण है, जिसे 2002 में वायुसेना में शामिल किया गया था। आज भी यह भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है। भारतीय सैन्य हार्डवेयर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रूसी मूल का है, ऐसे में मॉस्को के साथ रक्षा सहयोग भारत के लिए नई बात नहीं है।

अब सवाल यह है कि क्या भारत एक साथ अपने मौजूदा बेड़े को आधुनिक बनाएगा और साथ ही पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स की ओर निर्णायक कदम बढ़ाएगा। सुपर सुखोई अपग्रेड और Su-57 सौदे की दिशा आने वाले महीनों में भारत की हवाई शक्ति की रूपरेखा तय कर सकती है।
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