5 मई 2026। 2026 के FIFA World Cup 2026 के शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं, लेकिन भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में अब तक प्रसारण अधिकार तय नहीं हो पाए हैं। FIFA और ब्रॉडकास्टर्स के बीच जारी बातचीत के कारण लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों फुटबॉल फैंस के मैच देखने पर अनिश्चितता बनी हुई है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अभी तक कोई ब्रॉडकास्ट डील फाइनल नहीं हुई है, जबकि चीन में भी स्थिति साफ नहीं है। टूर्नामेंट 11 जून से अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में शुरू होना है, लेकिन इतने कम समय में डील का अटकना असामान्य माना जा रहा है।
FIFA का कहना है कि भारत और चीन में मीडिया राइट्स को लेकर बातचीत जारी है और फिलहाल इसे गोपनीय रखा गया है। संगठन ने यह भी बताया कि वह दुनिया के 175 से अधिक क्षेत्रों में प्रसारण समझौते पहले ही कर चुका है।
भारत में Reliance Industries और Disney के जॉइंट वेंचर ने करीब 20 मिलियन डॉलर की बोली लगाई है। हालांकि, यह रकम FIFA की शुरुआती मांग—2026 और 2030 वर्ल्ड कप के लिए कुल 100 मिलियन डॉलर—से काफी कम है।
वहीं Sony Group ने भी बातचीत की थी, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार उसने बोली लगाने से पीछे हटने का फैसला किया।
एक बड़ी चुनौती टाइमिंग भी है। ज्यादातर मैच भारतीय समयानुसार रात 10 बजे के बाद और आधी रात के आसपास खेले जाएंगे। 104 मैचों में से करीब 87% मुकाबले देर रात होने की संभावना है, जिससे टीवी व्यूअरशिप और विज्ञापन राजस्व पर असर पड़ सकता है। क्रिकेट-प्रधान भारतीय बाजार में फुटबॉल पहले से ही विज्ञापन के लिहाज से कमजोर माना जाता है।
गौरतलब है कि FIFA World Cup 2022 के दौरान भारत और चीन का डिजिटल व्यूअरशिप में संयुक्त हिस्सा 22.6% था। उस समय रिलायंस की मीडिया इकाई ने भारत में करीब 60 मिलियन डॉलर में प्रसारण अधिकार हासिल किए थे।
वैश्विक स्तर पर फुटबॉल का क्रेज कम नहीं हुआ है। 2022 वर्ल्ड कप से करीब 5 अरब लोग जुड़े थे, जबकि अर्जेंटीना और फ्रांस के बीच फाइनल मैच को लगभग 1.5 अरब दर्शकों ने देखा था।
अब सवाल सीधा है—अगर डील जल्द फाइनल नहीं होती, तो क्या दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल टूर्नामेंट भारत के दर्शकों के लिए ‘ब्लैकआउट’ बन जाएगा? फिलहाल जवाब अधर में है।















