19 अप्रैल 2026। भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने पारंपरिक कारीगरों को डिजिटल युग से जोड़ने की दिशा में एक अहम पहल की है। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत देशभर में 2,500 से अधिक कारीगरों और शिल्पकारों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे अपनी आजीविका और कारोबार को मजबूत बना सकें।
यह पहल “सामाजिक कल्याण के लिए एआई” के दृष्टिकोण पर आधारित है, जिस पर प्रधानमंत्री ने इंडियाएआई इम्पैक्ट समिट के दौरान जोर दिया था। खास बात यह है कि यह अपनी तरह का पहला सरकारी प्रयास है, जिसमें जमीनी स्तर के कारीगरों को तेजी से बढ़ते एआई इकोसिस्टम से जोड़ने की कोशिश की गई है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरी तरह व्यावहारिक और आसान भाषा में तैयार किया गया, ताकि अलग-अलग पेशों से जुड़े कारीगर इसे आसानी से समझ सकें। इसमें प्रतिभागियों को ChatGPT, Indus और Google Gemini जैसे प्रमुख एआई टूल्स से परिचित कराया गया और उनके वास्तविक उपयोग सिखाए गए।
क्या सिखाया गया प्रशिक्षण में
इस पहल के तहत कारीगरों को कई अहम कौशल सिखाए गए, जिनमें शामिल हैं:
एआई और उसके प्रमुख टूल्स की बुनियादी समझ
ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन और पैकेजिंग की आधुनिक तकनीकें
डिजिटल और एआई के जरिए कारोबार की दक्षता बढ़ाना
नए ग्राहकों तक पहुंच और मार्केट विस्तार
एआई के माध्यम से उत्पाद विवरण और विजुअल कंटेंट तैयार करना
देशभर में भागीदारी
इस कार्यक्रम में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कारीगर शामिल हुए। तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, बिहार और कर्नाटक जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में लाभार्थियों ने हिस्सा लिया। कुल मिलाकर 2,543 कारीगर इस पहल से जुड़े।
परंपरा और तकनीक का मेल
मंत्रालय का मानना है कि एआई को पारंपरिक शिल्पकला से जोड़कर न सिर्फ डिजिटल खाई को कम किया जा सकता है, बल्कि भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी भी बनाया जा सकता है। इससे कारीगरों को नए बाजार और ग्राहक मिलेंगे, और उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी।
कुल मिलाकर, यह पहल भारतीय कारीगरों की पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर उन्हें वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।














