वित्तीय अपराधों पर लगाम कसने के लिए दोनों एजेंसियां मिलकर करेंगी इंटेलिजेंस शेयरिंग, प्रशिक्षण और निगरानी
16 अप्रैल 2026। देश में धन-शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने के लिए Financial Intelligence Unit – India और Securities and Exchange Board of India के बीच एक अहम समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते का मकसद दोनों एजेंसियों के बीच सूचना साझाकरण, समन्वय और जांच क्षमता को मजबूत करना है।
इस MoU पर FIU-IND के निदेशक अमित मोहन गोविल और SEBI के पूर्णकालिक सदस्य संदीप प्रधान ने हस्ताक्षर किए। इसे देश में वित्तीय अपराधों के खिलाफ सहयोग के नए चरण की शुरुआत माना जा रहा है।
क्या होगा इस समझौते से
इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थाएं अपने-अपने डेटाबेस से जुड़ी अहम खुफिया जानकारी साझा करेंगी। साथ ही, मनी लॉन्ड्रिंग रोधी नियमों के तहत आने वाली रिपोर्टिंग संस्थाओं के लिए स्पष्ट प्रक्रियाएं और सिस्टम विकसित किए जाएंगे, ताकि संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्टिंग और निगरानी ज्यादा प्रभावी हो सके।
यह समझौता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सहयोग बढ़ाएगा। एगमोंट ग्रुप के सूचना विनिमय सिद्धांतों के तहत विदेशी वित्तीय खुफिया इकाइयों के साथ डेटा शेयरिंग को भी मजबूती मिलेगी।
ट्रेनिंग और जागरूकता पर फोकस
MoU के तहत दोनों एजेंसियां मिलकर वित्तीय संस्थाओं और बाजार से जुड़े प्रतिभागियों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाएंगी। खास ध्यान एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और काउंटर टेरर फाइनेंसिंग (CFT) क्षमताओं को मजबूत करने पर रहेगा।
जोखिम पहचान और निगरानी
इस सहयोग में वित्तीय सेक्टर में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण से जुड़े जोखिमों की पहचान, संदिग्ध लेनदेन के लिए अलर्ट सिस्टम विकसित करना और रिपोर्टिंग संस्थाओं के अनुपालन की निगरानी भी शामिल है।
दोनों एजेंसियां इस दिशा में नियमित समीक्षा के लिए हर तीन महीने में बैठकें करेंगी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करेंगी।
FIU-IND और SEBI की भूमिका
Financial Intelligence Unit – India देश की प्रमुख एजेंसी है, जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटाने, उसका विश्लेषण करने और उसे संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने का काम करती है।
वहीं Securities and Exchange Board of India भारत के पूंजी बाजार का नियामक है, जो निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।
क्यों अहम है यह कदम
डिजिटल लेनदेन और ग्लोबल फाइनेंशियल नेटवर्क के विस्तार के बीच वित्तीय अपराध भी जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे में यह समझौता न केवल जांच एजेंसियों की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि पूरे वित्तीय सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।














