12 अप्रैल 2026। हैदराबाद की युवा कंप्यूटर इंजीनियर ग्रीष्मा कलेपु ने NASA के महत्वाकांक्षी Artemis II मिशन में योगदान देकर अपने बचपन के सपने को साकार किया है। फ्लाइट डेटा सिस्टम में विशेषज्ञता रखने वाली ग्रीष्मा इस प्रोजेक्ट का हिस्सा रहीं, जहां उन्होंने सिस्टम मॉडिफिकेशन और सिमुलेशन से जुड़े अहम पैरामीटर्स की लगातार मॉनिटरिंग और वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी संभाली।
Artemis-II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की परिक्रमा करते हुए करीब 10 दिनों का ऐतिहासिक सफर पूरा किया। इस उपलब्धि के बाद ग्रीष्मा ने साफ किया कि वह NASA में ही अपने करियर को आगे बढ़ाना चाहती हैं।
ग्रीष्मा ने बताया कि उनका परिवार मूल रूप से हैदराबाद से है, हालांकि उनका जन्म अमेरिका में हुआ था। उनके पिता रवि शेखर स्टार्टअप मेंटर हैं, जबकि मां निरुपमा ने हमेशा उनके सपनों को दिशा दी। बचपन में Kalpana Chawla की स्पेस शटल दुर्घटना को टीवी पर देखने का अनुभव उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बना। उसी घटना ने उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान की ओर प्रेरित किया।
उन्होंने कहा, “उसके बाद मेरी पढ़ाई, ड्रॉइंग और कहानियां—सब कुछ स्पेस के इर्द-गिर्द ही घूमने लगा।” महज 10 साल की उम्र में उन्होंने स्पेस साइंटिस्ट बनने का फैसला कर लिया था।
स्कूल के दिनों में उन्होंने NASA एस्ट्रोनॉमी ओलंपियाड में दूसरा स्थान हासिल किया, जिससे उन्हें केनेडी स्पेस सेंटर के ट्रेनिंग प्रोग्राम का मौका मिला। हालांकि, उन्होंने इसे ठुकराते हुए तय किया कि वह वहां विजिटर नहीं, बल्कि एक कर्मचारी के रूप में प्रवेश करेंगी।
ग्रीष्मा ने वेल्लोर से इलेक्ट्रॉनिक्स और इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और ‘SEDS’ (Students for the Exploration and Development of Space) क्लब से जुड़कर कई अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स पर काम किया। चंद्रयान मिशन के दौरान लॉन्च हुए 104 सैटेलाइट्स में से 35 के विकास में भी उनकी भूमिका रही। उन्होंने ऑटोनॉमस फ्लाइट नेविगेशन और पेलोड सिस्टम जैसे जटिल प्रोजेक्ट्स पर काम किया।
2022 में उन्होंने Georgia Institute of Technology से मास्टर्स के लिए दाखिला लिया और पहले ही साल में NASA में इंटर्नशिप हासिल कर ली। इसके बाद मैरीलैंड स्थित गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में उन्होंने इलेक्ट्रिकल सिस्टम और पावर कंट्रोल पर काम किया।
2024 में इंटर्नशिप पूरी करने के बाद ग्रीष्मा ने फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर में कंप्यूटर इंजीनियर के रूप में जॉइन किया। उन्होंने आर्टेमिस प्रोजेक्ट से जुड़े जटिल रिसर्च और टेस्टिंग को रिकॉर्ड समय में पूरा किया, जिसके चलते उन्हें मिशन में अहम जिम्मेदारी सौंपी गई।
अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा, “टीम में ज्यादातर लोग मुझसे ज्यादा अनुभवी थे, लेकिन मेरे पैशन को देखकर उन्होंने मुझे पूरा सपोर्ट किया। हमने लगातार शिफ्ट में काम किया।”
मिशन लॉन्च के पल को याद करते हुए ग्रीष्मा भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “लॉन्च होते ही मेरी आंखों में आंसू आ गए। अब कई प्राइवेट स्पेस कंपनियों से ऑफर मिल रहे हैं, लेकिन मैंने NASA में ही रहने का फैसला किया है।”
अंत में उन्होंने युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए संदेश देते हुए कहा, “अगर जुनून हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। लेकिन परिवार का साथ उतना ही जरूरी है।”















