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डोपिंग पर सख्त एक्शन की तैयारी: तस्करी और सेवन में शामिल लोगों पर लगेगा आपराधिक कानून – मांडविया

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📍 भोपाल
डोपिंग पर सख्त एक्शन की तैयारी: तस्करी और सेवन में शामिल लोगों पर लगेगा आपराधिक कानून – मांडविया
भारत ने वाडा सम्मेलन में वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर, डोपिंग को बताया संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

16 अप्रैल 2026। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने साफ संकेत दिया है कि सरकार अब डोपिंग के खिलाफ और कड़ा रुख अपनाने जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी और सेवन में शामिल लोगों पर जल्द ही आपराधिक प्रावधान लागू किए जाएंगे।

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) के ग्लोबल एंटी-डोपिंग इंटेलिजेंस एंड इन्वेस्टिगेशन नेटवर्क (GAIIN) के सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए मांडविया ने कहा कि डोपिंग अब केवल व्यक्तिगत गलती नहीं रह गई है, बल्कि यह एक संगठित बहुराष्ट्रीय नेटवर्क का रूप ले चुकी है। ऐसे में इससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारत ने डोपिंग के खिलाफ केवल नियमों के पालन के लिए नहीं, बल्कि खेलों की ईमानदारी बनाए रखने के उद्देश्य से सक्रिय सुधार किए हैं। राष्ट्रीय डोपिंग विरोधी अधिनियम 2022 को मजबूत कानूनी आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि 2025 का संशोधन इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाता है।

मांडविया ने जोर देकर कहा कि सरकार अब डोपिंग से जुड़े पूरे इकोसिस्टम पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है, जिसमें सप्लाई चेन और तस्करी नेटवर्क भी शामिल हैं।

वैश्विक सहयोग पर जोर
मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना डोपिंग के खिलाफ लड़ाई अधूरी है। GAIIN जैसे प्लेटफॉर्म विभिन्न देशों, एजेंसियों और विशेषज्ञों को एक साथ लाकर इस चुनौती से निपटने में अहम भूमिका निभाते हैं।

वाडा के अध्यक्ष विटॉल्ड बांका ने भी कहा कि डोपिंग विरोधी अभियान अब केवल खेल संगठनों तक सीमित नहीं रह सकता। इसमें कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने बताया कि वाडा का इंटेलिजेंस मॉडल इंटरपोल और यूरोपोल जैसे संस्थानों के सहयोग से काम करता है।

भारत का बढ़ता रोल
मांडविया ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों और वाडा कार्यशालाओं की मेजबानी कर अपनी जांच क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से एक वैश्विक खेल शक्ति के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि ये पहल खेल संस्कृति को मजबूत बना रही हैं और युवाओं को खेलों से जोड़ रही हैं।

शिक्षा और टेक्नोलॉजी पर फोकस
डोपिंग रोकने के लिए सरकार केवल सजा पर नहीं, बल्कि जागरूकता और शिक्षा पर भी ध्यान दे रही है। मांडविया ने कहा कि सही समय पर सही जानकारी मिलने से खिलाड़ी गलत फैसलों से बच सकते हैं।

राष्ट्रीय डोप रोधी एजेंसी (NADA) द्वारा कार्यशालाओं, डिजिटल अभियानों और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए खिलाड़ियों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए भी अलग से मॉड्यूल तैयार किए गए हैं।

उन्होंने “Know Your Medicine” जैसे मोबाइल ऐप का जिक्र करते हुए कहा कि यह खिलाड़ियों को दवाओं में मौजूद प्रतिबंधित पदार्थों की पहचान करने में मदद करता है।

जांच और टेस्टिंग में बढ़ोतरी
सरकार ने डोपिंग जांच को भी तेज किया है। 2019 में जहां करीब 4,000 टेस्ट किए गए थे, वहीं पिछले साल यह संख्या बढ़कर लगभग 8,000 हो गई। साथ ही, पॉजिटिव मामलों में भी कमी आई है, जो 5.6% से घटकर 2% से नीचे आ गई है।

आगे की रणनीति
मांडविया ने बताया कि भारत वाडा मानकों के अनुरूप नई ड्रग टेस्टिंग लैब स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि डोपिंग जैसी जटिल समस्या से अकेले कोई संस्था नहीं निपट सकती, इसके लिए सरकार, खेल संगठनों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है।

उन्होंने अंत में कहा कि भारत का लक्ष्य सिर्फ मेडल जीतना नहीं, बल्कि खेलों में ईमानदारी और निष्पक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना है।
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