3 मई 2026। भारत-रूस की साझेदारी से बनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड कमाई दर्ज की है। कंपनी की आय में 48.6% की तेज़ बढ़त हुई है, जो बढ़ते वैश्विक रक्षा निर्यात के बीच इसकी मजबूत होती पकड़ को दिखाती है।
DRDO के मुताबिक, ब्रह्मोस एयरोस्पेस की कुल कमाई 548.24 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जो पिछले साल के 368.9 मिलियन डॉलर से काफी अधिक है। कंपनी को इस दौरान 420 मिलियन डॉलर के दो बड़े निर्यात ऑर्डर भी मिले हैं।
इसी बीच, वियतनाम के साथ करीब 611.5 मिलियन डॉलर की बड़ी डील पर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम की नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इस डील में तटीय सुरक्षा के लिए ज़मीन आधारित ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम, ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट शामिल होगा।
अगर यह समझौता होता है, तो वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया का तीसरा देश बन जाएगा जो सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों को अपने रक्षा तंत्र में शामिल करेगा। इससे पहले फिलीपींस 2023 के 375 मिलियन डॉलर के सौदे के तहत ब्रह्मोस सिस्टम हासिल कर चुका है, जबकि इंडोनेशिया भी इस दिशा में आगे बढ़ चुका है।
ब्रह्मोस मिसाइल, जिसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदियों से लिया गया है, दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में गिनी जाती है। इसकी बढ़ती मारक क्षमता और अपग्रेडेड रेंज के चलते एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जो बदलते रणनीतिक समीकरणों का साफ संकेत है।















