27 फरवरी 2026। पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया है कि तालिबान सरकार ने अफ़गानिस्तान को भारत की “कॉलोनी” बना दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच हालात अब “ओपन वॉर” जैसे हैं।
यह बयान उस समय आया जब इस्लामाबाद ने अफ़गानिस्तान के कई शहरों, जिनमें राजधानी काबुल भी शामिल है, पर सैन्य कार्रवाई की। हमलों के कुछ घंटों बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आसिफ ने लिखा कि दोनों देशों के रिश्ते अब खुली जंग की स्थिति में पहुँच चुके हैं।
आसिफ ने कहा कि 2021 में NATO सेनाओं की वापसी के बाद उम्मीद थी कि अफ़गानिस्तान में स्थिरता आएगी और तालिबान क्षेत्रीय शांति पर ध्यान देगा। लेकिन उनके मुताबिक, ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि तालिबान ने देश को भारत के प्रभाव में सौंप दिया और दुनिया भर के आतंकवादियों को पनाह देकर आतंकवाद “एक्सपोर्ट” करना शुरू कर दिया।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने दावा किया कि इस्लामाबाद ने हालात सामान्य करने के लिए सीधे संवाद और मित्र देशों के माध्यम से कूटनीतिक प्रयास किए, लेकिन तालिबान “भारत का प्रॉक्सी” बन गया। उन्होंने कहा कि अब पाकिस्तान का “सब्र खत्म हो चुका है।”
भारत ने इन ताज़ा आरोपों पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस्लामाबाद पहले भी नई दिल्ली पर काबुल के साथ अपने टकराव को हवा देने का आरोप लगाता रहा है, जिसे भारत लगातार खारिज करता आया है।
अगस्त 2021 में एक बस धमाके में नौ चीनी नागरिकों समेत 13 लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद पाकिस्तान ने भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग और अफ़गानिस्तान की तत्कालीन एजेंसी नेशनल डायरेक्टरेट ऑफ सिक्योरिटी पर आरोप लगाए थे। हालांकि इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक तौर पर कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए।
पिछले अक्टूबर में, अफ़गान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की मुलाकात से कुछ घंटे पहले काबुल में एक और विस्फोट हुआ था। स्थानीय मीडिया ने उस घटना को अफ़गानिस्तान–पाकिस्तान तनाव से जोड़ा था।
चार साल पहले तालिबान के सत्ता में आने के बाद से भारत और अफ़गानिस्तान के संबंधों में ठंडापन था, लेकिन अक्टूबर में दोनों देशों ने राजनयिक संपर्क बहाल करने पर सहमति जताई।
इस बीच क्षेत्रीय चिंता भी बढ़ रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दोनों पड़ोसी देशों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रमज़ान के महीने में संवाद और कूटनीति के ज़रिए मतभेद सुलझाए जाने चाहिए।














