8 मार्च 2026। अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट Christopher Landau ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करना चाहता है, लेकिन वह नहीं चाहता कि भारत भविष्य में चीन की तरह एक शक्तिशाली आर्थिक प्रतिस्पर्धी बन जाए।
नई दिल्ली में आयोजित Raisina Dialogue में बोलते हुए लैंडौ ने कहा कि वॉशिंगटन अब वही रणनीतिक गलती नहीं दोहराएगा जो दो दशक पहले चीन के साथ की गई थी। उन्होंने संकेत दिया कि उस समय अमेरिका ने चीन को बड़े पैमाने पर बाजार तक पहुंच दी, जिसका नतीजा यह हुआ कि बाद में चीन कई व्यापारिक क्षेत्रों में अमेरिका का बड़ा प्रतिस्पर्धी बन गया।
#WATCH | Delhi | Addressing the Raisina Dialogue 2026, US Deputy Secretary of State Christopher Landau says, "We have to be able to explain to our people how we are making stronger again and frankly, we expect other countries to be pursuing their interests. So just as President… pic.twitter.com/lpHlymSTFl
— ANI (@ANI) March 5, 2026
लैंडौ ने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के साथ होने वाले व्यापार और आर्थिक समझौते अमेरिकी हितों के अनुकूल हों। उन्होंने कहा, “हमें अपने नागरिकों के प्रति जवाबदेह रहना है, ठीक वैसे ही जैसे भारत सरकार अपने लोगों के प्रति जवाबदेह है।”
उन्होंने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील की बातचीत अब अंतिम चरण में है और यह “लगभग फिनिश लाइन” पर पहुंच चुकी है।
अमेरिका के कई रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2001 में World Trade Organization में चीन की एंट्री का समर्थन करना वॉशिंगटन के लिए एक बड़ी रणनीतिक भूल साबित हुआ। इसके बाद चीनी आयात में तेज वृद्धि हुई और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लाखों नौकरियां खत्म हो गईं।
नीतिनिर्माताओं का यह भी कहना है कि चीन की सरकारी सब्सिडी और गैर-बाजार नीतियों को रोकने में अमेरिका असफल रहा। इससे बीजिंग को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और बड़े बाजार तक पहुंच का फायदा मिला, जिसने उसे वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में तेजी से मजबूत बनाया।
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के संबंध खासकर व्यापार और तकनीक के मुद्दों पर काफी तनावपूर्ण रहे हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ ने दोनों देशों के बीच बड़े स्तर पर ट्रेड वॉर को जन्म दिया।
ट्रंप के “अमेरिका फर्स्ट” दृष्टिकोण के बाद से अमेरिका ने भारत, चीन और European Union सहित कई देशों के साथ व्यापार वार्ताओं में अधिक सख्त रुख अपनाया है।
भारत और अमेरिका पिछले एक साल से ज्यादा समय से व्यापक ट्रेड समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। फरवरी में दोनों देशों ने एक अंतरिम समझौते की घोषणा की थी, जिसके तहत रूस से तेल आयात को लेकर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत टैरिफ हटाया गया था। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद नई दिल्ली ने समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने में कुछ देरी की है।
इस बीच भारत ने अपनी व्यापारिक रणनीति में विविधता लाने के लिए United Kingdom, Oman, New Zealand और European Union के साथ भी कई नए व्यापार समझौते किए हैं। इसका उद्देश्य निर्यात बाजार का विस्तार करना और अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है।














