9 मार्च 2026। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल के बीच अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने पर दी गई अस्थायी छूट का बचाव किया है। वहीं भारत ने साफ कहा है कि उसे रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए वॉशिंगटन की अनुमति की जरूरत नहीं है और वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के अनुसार आयात जारी रखेगा।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह छूट वैश्विक तेल सप्लाई में संभावित कमी को रोकने के लिए दी गई है। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री Chris Wright ने रविवार को एक इंटरव्यू में कहा कि भारत समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल की खेप खरीदकर अपनी रिफाइनरियों में भेज सकता है, ताकि ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण सप्लाई पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत Mike Waltz ने भी कहा कि 30 दिन की यह राहत जहाजों में लदे लाखों बैरल रूसी तेल को भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचने की अनुमति देगी।
इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने घोषणा की थी कि भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी गई है। उनके मुताबिक यह कदम ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बनाने की कोशिशों को कम करने के लिए उठाया गया है।
बेसेंट ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के अनुरोध पर भारत ने पहले रूसी तेल की खरीद कम की थी और उसकी जगह अमेरिकी तेल लेने की योजना थी। हालांकि वैश्विक बाजार में अस्थायी कमी को देखते हुए भारत को सीमित अवधि के लिए रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी गई।
लेकिन भारत ने इस दावे से अलग रुख दिखाया है। भारतीय अधिकारियों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी “शॉर्ट-टर्म छूट” पर निर्भर नहीं है और न ही अमेरिका के दबाव में रूस से तेल आयात बंद करेगा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक फरवरी 2026 तक भी रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बना हुआ है।
दरअसल 2022 में Russia-Ukraine War शुरू होने के बाद भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीद काफी बढ़ा दी थी। पिछले साल अक्टूबर में अमेरिका द्वारा रूसी तेल कंपनियों Rosneft और Lukoil पर प्रतिबंध लगाए जाने से पहले भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड 1.88 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था।
डेटा फर्म केप्लर के अनुसार फरवरी 2026 में भारत ने करीब 1.12 से 1.16 मिलियन बैरल प्रतिदिन रूसी तेल आयात किया, जिससे साल-दर-साल लगभग 22 प्रतिशत गिरावट के बावजूद रूस भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना रहा।
इधर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि तेल कीमतों में उछाल अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई से नहीं रोकेगा।














