30 मार्च 2026। अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सैन्य इस्तेमाल को लेकर चल रहे विवाद में बड़ा मोड़ आया है। एक फेडरल कोर्ट ने पेंटागन के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें AI कंपनी Anthropic को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था।
कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार की कार्रवाई बदले की भावना से प्रेरित लगती है और संभव है कि इसमें कानून का उल्लंघन हुआ हो। मामला तब शुरू हुआ जब Anthropic ने अपनी AI तकनीक के सैन्य उपयोग पर आपत्ति जताई और इसे सीमित रखने की बात कही।
क्या है पूरा विवाद?
Anthropic, जो अपने Claude जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल के लिए जानी जाती है, का अमेरिकी रक्षा विभाग से टकराव तब बढ़ा जब पेंटागन ने उसकी तकनीक को “सभी कानूनी उद्देश्यों” के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी। कंपनी ने इससे इनकार करते हुए चेतावनी दी कि इसका दुरुपयोग घरेलू निगरानी या स्वायत्त हथियारों के रूप में हो सकता है।
इसके बाद पेंटागन ने सख्त कदम उठाते हुए:
कंपनी को “संभावित खतरे” की श्रेणी में डाल दिया
सरकारी ठेकेदारों को Anthropic के साथ काम बंद करने का आदेश दिया
उसके AI सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी
कोर्ट ने क्या कहा?
US डिस्ट्रिक्ट जज Rita Lin ने इस कार्रवाई को First Amendment के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार किसी कंपनी को सिर्फ इसलिए “दुश्मन” नहीं ठहरा सकती क्योंकि उसने नीतियों पर असहमति जताई।
जज ने इस सोच को “Orwellian” करार देते हुए कहा कि ऐसी श्रेणियां आमतौर पर आतंकवादी या विदेशी एजेंसियों के लिए होती हैं, न कि घरेलू कंपनियों के लिए।
मामला कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
Anthropic ने Donald Trump प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर करते हुए इसे “गैर-कानूनी और अभूतपूर्व” कदम बताया। कंपनी का आरोप है कि उसकी आलोचना के कारण सरकार ने उसके खिलाफ कार्रवाई की।
पेंटागन का रुख
इस बीच, युद्ध सचिव Pete Hegseth ने कंपनी पर “विश्वासघात” का आरोप लगाया और संकेत दिया कि सरकार अब ज्यादा “देशभक्त” विकल्प चुनेगी। इसी क्रम में पेंटागन ने OpenAI के साथ नया समझौता किया।
OpenAI के CEO Sam Altman के मुताबिक, इस डील में:
घरेलू निगरानी को रोकने के सुरक्षा उपाय
सैन्य उपयोग में मानव निगरानी (human oversight) अनिवार्य
असर क्या होगा?
Anthropic का कहना है कि इस विवाद से उसके बिज़नेस पर बड़ा असर पड़ा है। कई सरकारी एजेंसियों ने उसके प्रोडक्ट्स हटाने शुरू कर दिए हैं, जिससे कंपनी को भविष्य में अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है।















