14 मई 2026। अमेरिका का रक्षा मुख्यालय पेंटागन अब अपने तेजी से घटते हथियार भंडार को दोबारा मजबूत करने की बड़ी तैयारी में जुट गया है। यूक्रेन युद्ध, ईरान के खिलाफ अभियानों और चीन के साथ संभावित तनाव को देखते हुए अमेरिका ने हजारों कम लागत वाली क्रूज़ और हाइपरसोनिक मिसाइलें खरीदने की योजना बनाई है।
पेंटागन ने ऐलान किया है कि वह 10,000 से अधिक लो-कॉस्ट क्रूज़ मिसाइलें और करीब 12,000 सस्ती हाइपरसोनिक मिसाइलें हासिल करना चाहता है। इस पहल का मकसद लंबे समय तक चलने वाले संभावित युद्धों के लिए हथियारों का पर्याप्त भंडार तैयार करना है।
दिलचस्प बात यह है कि इस बार पेंटागन पारंपरिक रक्षा कंपनियों पर कम और नई उभरती रक्षा टेक कंपनियों पर ज्यादा भरोसा कर रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग का मानना है कि बड़ी हथियार कंपनियों के मुकाबले स्टार्टअप तेजी से उत्पादन और तकनीकी नवाचार कर सकते हैं।
इस परियोजना के तहत Anduril, CoAspire, Leidos और Zone 5 जैसी कंपनियों के साथ फ्रेमवर्क समझौते किए गए हैं। ये कंपनियां “Low-Cost Containerized Missiles (LCCM)” प्रोग्राम के तहत नई मिसाइल प्रणालियां विकसित करेंगी।
हालांकि पेंटागन ने “कंटेनराइज्ड” सिस्टम की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन प्रचार सामग्री में ऐसी मिसाइलें दिखाई गई हैं जिन्हें सामान्य शिपिंग कंटेनरों से लॉन्च किया जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे सिस्टम मालवाहक जहाजों में छिपाकर आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाए जा सकते हैं और अचानक हमले में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
पेंटागन के मुताबिक चारों कंपनियां जून से परीक्षण मिसाइलों की आपूर्ति शुरू कर सकती हैं। Anduril ने कहा है कि वह अपनी Barracuda-500M क्रूज़ मिसाइल की कम से कम 1,000 यूनिट अगले तीन वर्षों में उपलब्ध कराएगी। वहीं Leidos अपनी AGM-190A Small Cruise Missile के बड़े संस्करण पर काम कर रही है।
इसी बीच अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्टार्टअप Castelion के साथ Blackbeard नाम की हाइपरसोनिक मिसाइलों की खरीद का भी समझौता किया है। शुरुआती चरण में अगले दो वर्षों में कम से कम 500 मिसाइलें खरीदी जाएंगी, जबकि लक्ष्य अगले पांच वर्षों में इसे 12,000 यूनिट तक पहुंचाने का है।
Blackbeard मिसाइल को HIMARS रॉकेट लॉन्चर और भविष्य के मानवरहित लॉन्च प्लेटफॉर्म से दागने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे कम लागत वाला हाइपरसोनिक हथियार बताया जा रहा है, हालांकि इसकी वास्तविक कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यूक्रेन को लगातार हथियार सहायता देने और ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य अभियानों ने अमेरिका की रक्षा उत्पादन क्षमता की सीमाओं को उजागर कर दिया है। इन अभियानों में बड़ी संख्या में Tomahawk क्रूज़ मिसाइलें और Precision Strike Missiles (PrSM) इस्तेमाल की गईं।
अमेरिकी सैन्य योजनाकारों ने यूक्रेन और मध्य-पूर्व के संघर्षों में कम लागत वाले ड्रोन और कामिकाज़े सिस्टम की प्रभावशीलता का भी गहराई से अध्ययन किया है। कम कीमत वाले लंबी दूरी के ड्रोन पारंपरिक महंगी मिसाइलों की तुलना में काफी कम लागत पर भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम साबित हुए हैं।
इसी रणनीति के तहत अमेरिकी वायुसेना ने पिछले वर्ष LUCAS (Low-Cost Uncrewed Combat Attack System) पेश किया था, जिसे कथित तौर पर ईरान के शाहिद-136 ड्रोन की तकनीक से प्रेरित बताया गया।
पेंटागन का मानना है कि सस्ते लेकिन प्रभावी हथियारों को महंगे उन्नत सिस्टम के साथ मिलाकर अमेरिका भविष्य में चीन जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ लंबे संघर्ष के लिए बेहतर तैयारी कर सकता है, खासकर ताइवान को लेकर संभावित टकराव की स्थिति में।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump चीन दौरे पर हैं। यह यात्रा कई सप्ताह तक टलती रही थी, जिसकी एक बड़ी वजह ईरान के साथ जारी तनावपूर्ण स्थिति बताई जा रही है।















