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तेहरान से तेल अवीव तक जंग की आहट, शुरू हुआ संयुक्त सैन्य ऑपरेशन

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 101

28 फरवरी 2026। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े सैन्य हमले शुरू किए हैं, और हालात तेजी से व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और वहां की मौजूदा सरकार पर दबाव बनाने के लिए “बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन” चल रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी अपने संदेश में ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमता और न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को निर्णायक रूप से कमजोर करने के उद्देश्य से की जा रही है।

इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इसे ईरान से उत्पन्न “अस्तित्व के खतरे” के खिलाफ संयुक्त अभियान बताया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा संरचना को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश है।

किन ठिकानों को निशाना बनाया गया
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी और इज़राइली हमलों में ईरान के न्यूक्लियर रिसर्च सुविधाओं, मिसाइल लॉन्च साइट्स, एयर डिफेंस सिस्टम और कमांड सेंटरों को टारगेट किया गया। कुछ सूत्रों का दावा है कि संवेदनशील परमाणु स्थलों के आसपास भी विस्फोट हुए हैं। हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर बड़े न्यूक्लियर नुकसान की पुष्टि नहीं की है।

तेहरान में कई जगहों पर धमाके सुने गए। स्थानीय मीडिया के अनुसार उस इलाके में भी धुआं देखा गया जहां राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के दफ्तर हैं।

ईरान का पलटवार
ईरान के शक्तिशाली अर्द्धसैनिक संगठन Islamic Revolutionary Guard Corps ने घोषणा की कि उसने जवाबी कार्रवाई में इज़राइल पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की पहली लहर शुरू कर दी है। इज़राइली सेना ने बैलिस्टिक मिसाइलों के लॉन्च होने की पुष्टि की है और कहा है कि कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया, लेकिन कुछ रिहायशी इलाकों तक भी पहुंचीं।

तेल अवीव और उत्तरी इज़राइल के शहरों में सायरन बजते रहे। कुछ इमारतों को नुकसान और लोगों के घायल होने की खबरें भी सामने आई हैं।

युद्ध की पृष्ठभूमि
यह टकराव अचानक नहीं है। पिछले कई महीनों से इज़राइल और ईरान के बीच छाया युद्ध चल रहा था। सीरिया, लेबनान और गाजा पट्टी में ईरान समर्थित समूहों की गतिविधियों को लेकर तनाव बढ़ा हुआ था। इज़राइल का आरोप है कि ईरान क्षेत्र में अपने सहयोगी संगठनों के जरिए उसे चारों तरफ से घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।

दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में हुई अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हुई। उसी समय खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक तैनाती बढ़ा दी गई थी। सैन्य विशेषज्ञ इसे स्पष्ट संकेत मान रहे थे कि हालात विस्फोटक मोड़ ले सकते हैं।

क्षेत्रीय और वैश्विक असर
इस संघर्ष का सीधा असर मध्य पूर्व की स्थिरता, तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। होरमुज़ जलडमरूमध्य के पास किसी भी सैन्य झड़प से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन फिलहाल जमीन पर हालात शांत होते नहीं दिख रहे। यदि ईरान अपने प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए लेबनान, इराक या यमन से मोर्चा खोलता है तो यह लड़ाई बहु-क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकती है।

साफ है कि यह सिर्फ सीमित हवाई हमलों का मामला नहीं रह गया। अब सवाल यह है कि क्या यह ऑपरेशन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोक पाएगा या फिर पश्चिम एशिया एक लंबे और महंगे युद्ध में फंसने जा रहा है।

आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह टकराव सीमित रहेगा या इतिहास इसे एक नए बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत के रूप में याद करेगा।

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