4 मार्च 2026। OpenAI ने अमेरिकी रक्षा विभाग यानी United States Department of Defense के साथ एक अहम समझौता किया है। इस डील के तहत कंपनी के एआई टूल्स का इस्तेमाल सेना के क्लासिफाइड सिस्टम में किया जाएगा। इसकी जानकारी कंपनी के CEO Sam Altman ने दी।
इस एग्रीमेंट में सख्त सेफ्टी गाइडलाइन शामिल की गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये वही गार्डरेल हैं जिनकी मांग पहले कॉम्पिटिटर Anthropic ने की थी।
यह घोषणा ऐसे समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने फेडरल एजेंसियों को एंथ्रोपिक के एआई सिस्टम के उपयोग पर रोक लगाने का आदेश दिया। ट्रंप ने मिलिट्री में एआई की तैनाती और कंपनियों द्वारा पेंटागन पर शर्तें थोपने की कोशिशों पर चिंता जताई थी।
ऑल्टमैन ने स्पष्ट किया कि पेंटागन ने सुरक्षा को लेकर गंभीर रुख अपनाया है और बेहतर परिणाम के लिए साझेदारी की इच्छा जताई है। उन्होंने दो मुख्य सिद्धांतों पर जोर दिया:
घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने की निगरानी पर रोक
ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम के इस्तेमाल में इंसानी जिम्मेदारी अनिवार्य
कंपनी ने यह भी कहा कि एआई मॉडल्स की सुरक्षा के लिए टेक्निकल सेफगार्ड और फुल-डिस्क एन्क्रिप्शन लागू किए जाएंगे। हालांकि यह व्यवस्था सिर्फ क्लाउड नेटवर्क तक सीमित रहेगी।
ऑल्टमैन ने पेंटागन से अपील की है कि यही सेफ्टी शर्तें सभी एआई कंपनियों पर समान रूप से लागू की जाएं और कानूनी टकराव से बचा जाए।
इससे पहले पेंटागन, क्लासिफाइड नेटवर्क में एंथ्रोपिक के क्लाउड मॉडल पर निर्भर था। लेकिन बाद में एंथ्रोपिक ने अपने सिस्टम का पूरा एक्सेस देने से इनकार कर दिया। कंपनी चाहती थी कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल घरेलू निगरानी या बिना मानवीय निगरानी के पूरी तरह ऑटोनॉमस हथियारों को टारगेट करने में न किया जाए।
पेंटागन अधिकारियों ने इसे सामान्य बिज़नेस शर्तों से आगे जाकर दबाव बनाने की कोशिश माना। डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी Emil Michael ने एंथ्रोपिक के CEO Dario Amodei की आलोचना करते हुए कहा कि मिलिट्री ऑपरेशन पर कंपनी का नियंत्रण स्वीकार्य नहीं है। यह विवाद पहले भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय रहा है।
सरकार ने एंथ्रोपिक के एआई सिस्टम के सरकारी उपयोग पर छह महीने की रोक लगाने के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर साफ लिखा कि अमेरिका को उस कंपनी की जरूरत नहीं है और आगे कोई डील नहीं की जाएगी।
एआई और रक्षा सहयोग पर यह नया अध्याय बताता है कि टेक्नोलॉजी अब सिर्फ इनोवेशन का विषय नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की रणनीति का हिस्सा बन चुकी है। सवाल यही है कि सुरक्षा और टेक्नोलॉजी के बीच यह संतुलन लंबे समय तक कैसे संभाला जाएगा।














