28 अप्रैल 2026। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने आरोप लगाया है कि ईरान Strait of Hormuz को “आर्थिक परमाणु हथियार” की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है।
रूबियो ने साफ कहा कि अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते पर तेहरान का नियंत्रण या उसकी शर्तों पर संचालन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। उनके मुताबिक, अगर ईरान जलडमरूमध्य को इस तरह खोलने की बात करता है कि बाकी देशों को उसकी अनुमति लेनी पड़े या दबाव में आना पड़े, तो यह असल में “खुला मार्ग” नहीं बल्कि नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और संघर्ष खत्म करने की बात कही गई है, लेकिन परमाणु मुद्दे पर बातचीत को बाद के लिए टालने का सुझाव दिया गया है।
Fox News को दिए इंटरव्यू में रूबियो ने इस प्रस्ताव पर संदेह जताते हुए कहा कि ऐसी किसी भी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जा सकता जिसमें समुद्री रास्ते की आज़ादी शर्तों से बंधी हो।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र पर इस तरह का नियंत्रण सामान्य मान लिया गया, तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा। उनके शब्दों में, यह स्थिति “एक आर्थिक परमाणु हथियार” जैसी होगी, जिसका इस्तेमाल वैश्विक दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी रूबियो ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यही इस पूरे विवाद की जड़ है और इसे टाला नहीं जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मौजूदा सत्ता संरचना में किसी नरम रुख की उम्मीद नहीं की जा सकती।
इस बीच, The White House ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के प्रस्ताव की समीक्षा की है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक वे इससे संतुष्ट नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव को मानने से अमेरिका की रणनीतिक स्थिति कमजोर पड़ सकती है, खासकर तब जब ट्रंप लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की मांग करते रहे हैं।
दूसरी तरफ, ईरान ने फिर दोहराया है कि उसका परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, उसने अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को सौंपने या परमाणु कार्यक्रम खत्म करने की अमेरिकी मांगों को मानने से साफ इनकार कर दिया है।
कुल मिलाकर, होर्मुज़ जलडमरूमध्य अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का नया केंद्र बनता जा रहा है।















