3 अप्रैल 2026। करीब पांच दशक बाद इंसानों की चांद तक वापसी की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए NASA ने आज अपने ऐतिहासिक Artemis II मिशन को चांद की ओर रवाना कर दिया। यह 1972 के Apollo 17 के बाद पहला मौका है, जब अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलकर चंद्रमा की दिशा में बढ़े हैं।
मिशन ने अपने सबसे अहम चरण ट्रांसलूनर इंजेक्शन (TLI) को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसके बाद अंतरिक्ष यान पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से निकलकर चांद की ओर बढ़ गया है। इस मिशन में Orion spacecraft के जरिए चार अंतरिक्ष यात्री सवार हैं।
क्रू में Reid Wiseman (कमांडर), Victor Glover, Christina Koch और Jeremy Hansen शामिल हैं। यह मिशन विविधता के लिहाज से भी खास है, क्योंकि इसमें पहली बार एक महिला और एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री चंद्र मिशन का हिस्सा बने हैं।
करीब 10 दिन के इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री चांद की कक्षा में प्रवेश नहीं करेंगे, बल्कि उसके नजदीक से फ्लाईबाय करते हुए महत्वपूर्ण डेटा और तस्वीरें जुटाएंगे। स्पेसक्राफ्ट चार दिन में चांद के पास पहुंचेगा और उसके दूर वाले हिस्से (फार साइड) का अध्ययन करेगा, जो पृथ्वी से सीधे दिखाई नहीं देता।
यह मिशन भविष्य के चंद्र अभियानों की तैयारी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। Artemis III जैसे आगामी मिशनों के लिए यह एक परीक्षण उड़ान है, जिसका लक्ष्य चांद पर इंसानों की स्थायी वापसी का रास्ता तैयार करना है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, Artemis कार्यक्रम केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा का भी हिस्सा है। चांद पर दोबारा पहुंचने की इस दौड़ में तकनीकी बढ़त हासिल करना आने वाले समय में अंतरिक्ष संसाधनों और मिशनों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
अगर यह मिशन सफल रहता है, तो यह मानव इतिहास में एक नए चंद्र युग की शुरुआत माना जाएगा।















