8 अप्रैल 2026। अमेरिका में ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump के खिलाफ महाभियोग की मांग तेज हो गई है। डेमोक्रेटिक सांसद John Larson ने राष्ट्रपति पर “गैर-कानूनी युद्ध” छेड़ने और देश की सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया है।
कनेक्टिकट से सांसद लार्सन ने कहा कि उन्होंने ट्रंप के खिलाफ 13 आरोपों के साथ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया है। उनका आरोप है कि ट्रंप की नीतियों ने ईरान के साथ तनाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है, जिससे अमेरिकी नागरिकों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
लार्सन ने ट्रंप की मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वे “दिन-ब-दिन अस्थिर” होते जा रहे हैं और अपने संवैधानिक कर्तव्यों को निभाने में नाकाम हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ट्रंप “पद पर बने रहने की सभी सीमाएं पार कर चुके हैं।”
इस मुद्दे पर डेमोक्रेटिक खेमे में व्यापक समर्थन भी दिख रहा है। पूर्व स्पीकर Nancy Pelosi और सीनेटर Chris Murphy समेत करीब 70 डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के मंत्रिमंडल से 25th Amendment to the United States Constitution लागू करने की मांग की है। इस प्रावधान के तहत उपराष्ट्रपति और कैबिनेट यह घोषित कर सकते हैं कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को निभाने में सक्षम नहीं हैं।
कुछ अन्य नेताओं ने भी इस मांग को और आक्रामक बनाया है। प्रतिनिधि Jim McGovern ने 25वें संशोधन को तुरंत लागू करने की बात कही, जबकि Lauren Underwood ने ट्रंप को “खतरनाक और अयोग्य” बताया।
यह राजनीतिक घमासान ऐसे समय में बढ़ा है जब ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित हमलों को दो हफ्तों के लिए टाल दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला तेहरान की ओर से आए एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय अपीलों के बाद लिया गया।
इससे पहले ट्रंप की ओर से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर दी गई सख्त चेतावनियों ने भी विवाद को हवा दी थी। वहीं, अमेरिकी हमलों में ईरान के कई अहम बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं, जिनमें पुल, रेल लाइनें और ऊर्जा ठिकाने शामिल बताए जा रहे हैं।
रिपब्लिकन नेताओं और ट्रंप समर्थकों ने इन कार्रवाइयों का बचाव करते हुए कहा है कि इनका उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था। हालांकि, ईरान इस आरोप को लगातार खारिज करता रहा है और अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता है।
अमेरिका में राष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं है। महाभियोग के लिए प्रतिनिधि सभा में साधारण बहुमत और सीनेट में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। ऐसे में यह लड़ाई सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि लंबी संसदीय प्रक्रिया में बदल सकती है।















