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ईरान में रेजीम चेंज पर अमेरिका का यू-टर्न? सांसद माइक टर्नर बोले, सरकार गिराना मकसद नहीं

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 151

2 मार्च 2026। Mike Turner ने कहा है कि अमेरिका का निशाना न तो ईरानी नेतृत्व है और न ही इस्लामिक रिपब्लिक की सरकार को गिराना। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब Donald Trump और Benjamin Netanyahu सार्वजनिक रूप से ईरान की जनता से अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील कर चुके हैं।

हाल ही में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei और कई वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की खबर सामने आई। वॉशिंगटन ने इस अभियान को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे दशकों पुरानी दुश्मनी का जवाब बताया और कहा कि यह ईरान में सरकार विरोधी ताकतों के लिए अवसर साबित हो सकता है। यह बयान नेतन्याहू की उस अपील से मेल खाता है जिसमें उन्होंने ईरानियों से सत्ता परिवर्तन का आह्वान किया था।

रविवार को CBS News के कार्यक्रम ‘Face the Nation’ में टर्नर ने कहा, “राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि हमारा निशाना सैन्य ढांचा और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर है, न कि सरकार या सत्ता परिवर्तन।” हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के पूर्व वरिष्ठ रिपब्लिकन नेता ने यह भी कहा कि सेक्रेटरी ऑफ स्टेट Marco Rubio ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि अमेरिका ने खामेनेई या ईरान के शीर्ष नेतृत्व को टारगेट नहीं किया।

जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब यह है कि इज़राइल ने खामेनेई पर हमला अमेरिकी मंजूरी के बिना किया, तो टर्नर ने सीधा जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि “एक हत्यारे तानाशाह से बेहतर है कि अमेरिका का दोस्त बना जाए,” और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

व्हाइट हाउस ने बताया है कि वह मंगलवार को कांग्रेस को इस ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी देगा। यह ब्रीफिंग ऐसे समय हो रही है जब प्रस्तावित वॉर पावर्स रेजोल्यूशन पर बहस होने वाली है। इस प्रस्ताव का मकसद कांग्रेस के उस संवैधानिक अधिकार को मजबूत करना है जिसके तहत युद्ध की घोषणा का अंतिम अधिकार संसद के पास होता है। अगर यह प्रस्ताव पहले लाया जाता तो प्रशासन की सैन्य रणनीति पर सवाल खड़े हो सकते थे।

राष्ट्रपति ट्रंप का यह फैसला राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बना हुआ है। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने अमेरिका को विदेशी युद्धों से दूर रखने का वादा किया था, लेकिन यह कार्रवाई उस रुख से अलग दिखाई देती है। राजनीतिक हलकों और पॉडकास्ट जगत में तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं कि इस सैन्य अभियान के पीछे असली प्रेरणा क्या थी।

इन अटकलों में ईरान-इज़राइल तनाव, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अमेरिकी घरेलू राजनीति तक कई बातें शामिल हैं। कुछ चर्चाओं में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति Nicolas Maduro का जिक्र भी किया गया, तो कहीं दिवंगत फाइनेंसर Jeffrey Epstein से जुड़े पुराने विवादों को भी घसीटा गया। हालांकि इन दावों का कोई आधिकारिक आधार सामने नहीं आया है।

फिलहाल वॉशिंगटन का आधिकारिक रुख यही है कि कार्रवाई का मकसद सैन्य ढांचे को निशाना बनाना था, न कि ईरान में शासन परिवर्तन करना। लेकिन जमीनी हालात और नेताओं के बयानों के बीच फर्क ने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा पेचीदा बना दिया है।

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