3 मार्च 2026। मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब भारत के कंडोम उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सप्लाई चेन में रुकावट के चलते गर्भनिरोधक निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अहम कच्चे माल—सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया—की भारी कमी हो गई है।
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत ने उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारत हर साल 6 अरब से ज्यादा कंडोम बनाता है, लेकिन यह एक कम मार्जिन वाला बाजार है, जिसकी कुल कीमत करीब 860 मिलियन डॉलर आंकी जाती है।
समस्या की जड़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आई रुकावट है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान द्वारा अमेरिका और इज़राइल के हमलों के जवाब में इस अहम समुद्री मार्ग को अधिकांश जहाजों के लिए बंद किए जाने से पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर सिलिकॉन ऑयल की उपलब्धता पर पड़ा है, जबकि अमोनिया की कीमतों में 40–50% तक उछाल का अनुमान है।
स्थिति का असर बाजार में भी दिखने लगा है। मुंबई और नई दिल्ली जैसे बड़े शहरों में दवा दुकानों पर कंडोम की कमी की खबरें सामने आ रही हैं।
डेटा के अनुसार, 2024 में भारत ने 6.4 अरब कंडोम का उत्पादन किया था, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 17% है—यानी इस संकट का असर सिर्फ घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई पर भी पड़ सकता है।
इस बीच, तेल संकट ने एक और झटका दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, विमानन ईंधन की कीमतें 1 अप्रैल से दोगुनी होकर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की आशंका है, जिससे लॉजिस्टिक्स और महंगे होने वाले हैं।















