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ट्रंप ने रोका AI निगरानी आदेश, मस्क और ज़ुकरबर्ग की लॉबिंग की चर्चा

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📍 भोपाल
ट्रंप ने रोका AI निगरानी आदेश, मस्क और ज़ुकरबर्ग की लॉबिंग की चर्चा
23 मई 2026। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर सख्त सरकारी निगरानी लागू करने वाले प्रस्तावित एग्जीक्यूटिव आदेश पर फिलहाल हस्ताक्षर टाल दिए हैं। ट्रंप का कहना है कि इस तरह के नियम अमेरिका की तकनीकी रफ्तार को धीमा कर सकते हैं और चीन के खिलाफ उसकी बढ़त को कमजोर कर सकते हैं। हालांकि अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बड़े टेक उद्योग के दबाव ने भी इस फैसले में अहम भूमिका निभाई।

इस प्रस्तावित आदेश की जानकारी सबसे पहले इस महीने की शुरुआत में The New York Times की रिपोर्ट में सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ऐसे नियमों पर विचार कर रहा था जिनके तहत उन्नत AI मॉडल आम लोगों के लिए जारी करने से पहले सरकारी समीक्षा से गुजरते।

योजना में डेवलपर्स के लिए एक स्वैच्छिक ढांचा प्रस्तावित था, जिसके तहत कंपनियों को नए AI सिस्टम लॉन्च करने से पहले अमेरिकी अधिकारियों को जानकारी देनी होती। इसका उद्देश्य संभावित AI आधारित साइबर हमलों से सुरक्षा बढ़ाना और सरकार को उन मॉडलों तक शुरुआती पहुंच देना था जिनका उपयोग पेंटागन जैसे रक्षा संस्थानों में किया जा सकता है।

बुधवार को एक प्रेस कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई क्योंकि इससे अमेरिका में AI विकास की गति प्रभावित हो सकती थी। उन्होंने कहा, “हम चीन से आगे हैं और मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहता जो हमारी बढ़त को नुकसान पहुंचाए।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि AI उद्योग अमेरिका में तेज आर्थिक विकास और रोजगार पैदा कर रहा है, इसलिए जरूरत से ज्यादा नियम इस सेक्टर के लिए “रुकावट” बन सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में बीजिंग यात्रा के दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ AI सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर चर्चा भी की थी।

इस बीच Semafor और The Washington Post की रिपोर्ट्स में कहा गया कि Elon Musk, Mark Zuckerberg और ट्रंप के पूर्व AI सलाहकार David Sacks ने इस आदेश को लेकर लॉबिंग की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, टेक कंपनियों को डर था कि सख्त निगरानी AI कारोबार की रफ्तार और मुनाफे दोनों को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि मस्क ने इन दावों को खारिज करते हुए X पर लिखा कि उन्हें आदेश के मसौदे की जानकारी ही नहीं थी और ट्रंप ने हस्ताक्षर टालने के बाद उनसे बातचीत की। वहीं Meta Platforms और सैक्स की वेंचर फर्म ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

AI सुरक्षा को लेकर बहस ऐसे समय तेज हुई है जब उन्नत AI सिस्टम से साइबर सुरक्षा और स्वायत्त हथियारों के खतरे बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। AI कंपनी Anthropic का क्लाउड मिथोस मॉडल भी इसी वजह से चर्चा में रहा, जिसे कथित तौर पर सुरक्षा चिंताओं के कारण सीमित रखा गया था।

फरवरी में जारी एक सर्वेक्षण के अनुसार, अधिकांश अमेरिकी चाहते हैं कि AI कंपनियां अपने उत्पादों के उपयोग पर सीमाएं तय करें, चाहे उपयोग सरकारों द्वारा ही क्यों न किया जाए। वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप को लेकर भी चिंता जताई।

अगर यह आदेश भविष्य में लागू होता है, तो यह ट्रंप की मौजूदा “कम से कम नियमन” वाली AI नीति से बड़ा बदलाव माना जाएगा। सत्ता में लौटने के बाद से ट्रंप लगातार अमेरिका को “AI सुपरपावर” बनाने की बात करते रहे हैं और AI को चीन से मुकाबले के लिए बेहद जरूरी तकनीक बता चुके हैं।
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