🔴 TRENDING NOW!
मध्य प्रदेश के नाम गौरवपूर्ण उपलब्धि: यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हुए चार और नए ऐतिहासिक स्थल छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद का हिस्सा समुदाय द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है - कलेक्टर रोशन सिंह डीएचएल एक्सप्रेस ने भारत में 2027 के लिए सालाना प्राइस एडजस्टमेंट्स की घोषणा की लोकतंत्र को खतरे में डाल रहे नेता प्रतिपक्ष, सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- इस्तीफा दें राहुल गांधी US जूरी का बड़ा फैसला: Facebook ने डेटा प्राइवेसी को लेकर यूज़र्स को गुमराह किया, 4.39 करोड़ उल्लंघन कृति सेनन ने उठाया महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा, कहा- बेटियां ऐसी दुनिया की हकदार हैं 'जिस घर में जन्मे, छोटे से बड़े हुए, खेले-कूदे...,' कहते-कहते भावुक हुए सीएम डॉ. यादव, अपने ही घर पर आखिर क्यों चलाई गैंती? मस्क के X के साथ खड़ा हुआ अमेरिका, EU के €120 मिलियन जुर्माने को अदालत में चुनौती एसबीआई कार्ड ने एसबीआई योनो के ज़रिए फिक्स्ड डिपॉज़िट पर आधारित सिक्योर्ड एडवांटेज एसबीआई कार्ड लॉन्च किया समीरा रेड्डी के साथ हॉर्लिक्स ने रोजमर्रा के पोषण में प्रोटीन की जरूरत पर डाला जोर, लॉन्च किया हॉर्लिक्स प्रोटीन पाउडर

हमारी आस्था को मजबूत बनाने के लिए इस तरह के आयोजन आवश्यक: गिरीश गौतम

👤
prativad
👁 1724 व्यूज
📍 Bhopal
हमारी आस्था को मजबूत बनाने के लिए इस तरह के आयोजन आवश्यक: गिरीश गौतम
19 मार्च 2023। राजधानी के मानस भवन में 17 से 19 मार्च तक चले पंचम अंतरराष्ट्रीय रामायण अधिवेशन के समापन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष गिरीश गौतम मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस सम्मेलन में विगत 3 दिनो मे कई से देशों पधारे लेखक,साहित्यकारों, मानस मर्मज्ञों ने अपने शोधपत्र वाचन किये तथा उनके व्याख्यान हुये । समापन समारोह में विधानसभा अध्यक्ष के साथ पूर्व आई ए एस श्री मनोज श्रीवास्तव, ओम प्रकाश गुप्ता यूएसए, (राम चरित भवन बोस्टन अमेरिक) एवं पूर्व सांसद श्री रघुनन्दन शर्मा उपस्थित थे।

यहां पर तीन दिन में कई शोध पत्र विद्वानों ने पढ़े हैं। वस्तुतः आज की परिस्थिति मे इस तरह के कार्य की महति आवश्यकता है, ऐसे रामायण सम्मेलनों की अधिकाधिक जरूरत है। कई विचार के लोग हमारे राम, हमारे मानस और हमारे धर्म पर हमला कर रहे हैं। तरह तरह से यह प्रयास हो रहा है कि हमारी आस्था और विश्वास पर कुठाराघात किया जाए। इस समय रामाणय पर हो रहे शोध के माध्यम से हमें इसकी महानता और सत्यता को प्रमाणित करना है।

भगवान वाल्मिकी जी ने जब रामायण की जो रचना की है वह भगवान श्री राम के समकालीन समय में की है, लेकिन गोस्वामी तुलसीदास जी की रामचरित मानस समकालीन नहीं है। मेरे विचार से रामचरित मानस की रचना जनबोली में की गई ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। इसका प्रमाण यह भी है कि आज गांवों में कई लोगों केा अक्षर ज्ञान नहीं होता है लेकिन वे राम चरित मानस गाते हुए दिखते हैं। रामचरित मानस में देखा जाए तो प्रकृति, राजनीति, स्वास्थ्य, पर्यावरण जैसे जीवन से जुड़े हर विषय के बारे में ज्ञानवर्धक बाते लिखी हुई हैं।

जो लोग बार बार राम चरित मानस पर सवाल उठाते हैं, क्या वे जानते हैं कि हमारे भारत के संविधान की हस्तलिखित प्रति को देखिए उसके प्रथम पृष्ठ पर प्रभु श्री राम, सीता माता और लक्ष्मण जी की तस्वीर बनी हुई है।
धर्म के नाम पर राजनीति नहीं होना चाहिए, लेकिन धर्म आधारित नीति पर राज होना चाहिए। और तुलसीसदास जी ने तो कहा ही है कि परहित सरसि धर्म नहीं भाई।

श्री गौतम ने आह्वान किया कि आज धर्म के प्रति हम सभी की आस्था और मजबूत बने इसके लिए इस तरह के शोध कार्यों की आवश्यकता है।


Madhya Pradesh, प्रतिवाद समाचार, प्रतिवाद, MP News, Madhya Pradesh News, Hindi Samachar, prativad.com


Tags :