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एम्स भोपाल को तीन महत्वपूर्ण विभाग मिलेंगे

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📍 भोपाल
एम्स भोपाल को तीन महत्वपूर्ण विभाग मिलेंगे
24 नवंबर 2023। इन विभागों की स्थापना से क्षेत्र की तत्काल चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक नैदानिक और चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

एम्स भोपाल की अकादमिक समिति ने गुरुवार को अपनी नौवीं बैठक में तीन महत्वपूर्ण विभागों- क्रिटिकल केयर मेडिसिन, मेडिकल जेनेटिक्स, और रुमेटोलॉजी और क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी की स्थापना को मंजूरी दे दी है।

इन विभागों की स्थापना से क्षेत्र की तत्काल चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक नैदानिक और चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

एम्स भोपाल राज्य में स्वास्थ्य सेवा का अग्रणी बनने के लिए तैयार है, क्योंकि ये विभाग देश में अपनी तरह के बहुत कम विभागों में से एक हैं। यह विकास संस्थान की शीर्ष स्तरीय चिकित्सा देखभाल प्रदान करने की प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

उत्कृष्टता के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को ट्रांसलेशनल मेडिसिन में एमएससी और अस्पताल प्रबंधन में स्नातकोत्तर जैसे पाठ्यक्रमों की मंजूरी से और भी बल मिला है। यह ट्रांसलेशनल मेडिसिन में एमएससी पाठ्यक्रम शुरू करने वाला देश का पहला संस्थान बनने की ओर भी अग्रसर है।

कुछ स्वीकृत पाठ्यक्रम:
बाल चिकित्सा सर्जरी में एमसीएच
कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी में एमसीएच
संयुक्त प्रतिस्थापन और पुनर्निर्माण में एमसीएच
बाल चिकित्सा आर्थोपेडिक्स सर्जरी में एमसीएच
बाल चिकित्सा रुधिर विज्ञान-ऑन्कोलॉजी में डीएम
बाल चिकित्सा नेफ्रोलॉजी में डीएम
एंडोक्रिनोलॉजी और चयापचय में डीएम
आपातकालीन चिकित्सा में एमडी
सार्वजनिक स्वास्थ्य दंत चिकित्सा में एमडीएस
मौखिक और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में एमडीएस

बीएमएचआरसी ने दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी से पीड़ित मरीज की दृष्टि बहाल की

भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) ने एक मध्यम आयु वर्ग की मरीज की दृष्टि बहाल कर दी है, जिसने एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी के कारण अपनी दृष्टि खो दी थी।

होशंगाबाद की 35 वर्षीय महिला एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी से पीड़ित थी, जिसके कारण उसकी एक आंख की रोशनी चली गई, जबकि दूसरी आंख की रोशनी भी कम हो गई थी।

बीएमएचआरसी में इलाज के बाद अब उनकी आंखों की रोशनी वापस आ गई है और वह सामान्य जीवन जीने लगी हैं। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत मरीज का मुफ्त इलाज किया गया।

न्यूरोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. चन्द्रशेखर रावत ने बताया कि महिला एंटी मॉग एंटीबॉडी डिजीज नामक बीमारी से पीड़ित थी, जो एक दुर्लभ ऑटोइम्यून डिमाइलेटिंग बीमारी है। ऐसे में क्लिनिकल जांच के आधार पर जरूरी दवाएं और इंजेक्शन दिए गए, जिससे मरीज की हालत में सुधार हुआ।

इलाज के बाद मरीज की दायीं आंख की रोशनी सामान्य हो गयी है, जबकि बायीं आंख में भी काफी सुधार है।

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