🔴 TRENDING NOW!
ISRO का फ्री AI/ML कोर्स: 4 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें आवेदन का तरीका सीएम डॉ. यादव ने गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में छोड़ी चीता 'सीसीबी-2', कहा- यह कदम हमारी "जियो और जीने दो" की भावना दिखाता है तथ्यों के साथ संवाद करें राहुल गांधी, मध्यप्रदेश के विकास की वास्तविक तस्वीर देखें : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कोई बनेगा सीए-कोई वकील-कोई शुरू करेगा स्टार्टअप, बच्चों से इंप्रेस सीएम डॉ. मोहन ने 7400 से ज्यादा छात्रों को दी स्कूटी भारत की अगली रक्षा लड़ाई सिर्फ मिसाइल और लड़ाकू विमानों से नहीं, AI और Cyber Security से भी होगी हाउस ऑफ मैकडॉवेल्स सोडा ने ‘यारी की नई वाइब’ के साथ यारी को दिया नया अंदाज़ कूनो फिर हुआ गुलजार, मादा चीता केजीपी12 के परिवार में आए चार नन्हे शावक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जगमगाया मध्यप्रदेश, शिप्रा तट-महाकाल महालोक में एक साथ जलाए गए 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड भारत के सरकारी और रक्षा संस्थानों पर साइबर खतरा, APT36 के नए Malware अभियान से अलर्ट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम डॉ. मोहन यादव ने की सेवा-संकल्प अभियान की शुरुआत, स्वामित्व अधिकार योजना के तहत 50 लाख संपत्तियों की होगी फ्री रजिस्ट्री

पैसे नहीं मिलने पर रेप की शिकायत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

👤
Digital Desk
👁 20927 व्यूज
📍 नई दिल्ली
पैसे नहीं मिलने पर रेप की शिकायत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
बलात्कार के आरोप में तीन व्यक्तियों को बरी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि ग्राहक यदि भुगतान करने से मना कर दे तो कोई यौनकर्मी इसे यौन हिंसा बताकर उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज नहीं कर सकता.



जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष और जस्टिस अमिताव रॉय की पीठ ने कहा है कि कथित बलात्कार के लिए किसी महिला की ओर से दिए गए सबूतों को अदालत में महत्व दिया जाना चाहिए लेकिन इसे 'परम सत्य' की तरह नहीं माना जा सकता.



सुप्रीम कोर्ट ने ये व्यवस्था बेंगलुरु के 20 साल पुराने एक मामले के संबंध में दी है. तब घरेलू कर्मचारी के तौर पर काम करने वाली एक महिला ने तीन लोगों पर अग़वा करके गैराज में उसके साथ बार-बार बलात्कार करने का आरोप लगाया था.



तीनों अभियुक्तों ने इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट से मिली सज़ा के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.

इस पर जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष और जस्टिस अमिताव रॉय की पीठ ने सबूतों पर दोबारा विचार करने के बाद कहा, "कथित घटना के दौरान पीड़िता का आचरण वैसा नहीं था जैसा किसी बलात्कार पीड़िता का होता है और ऐसा प्रतीत होता है कि कहीं कुछ सहमति तो थी."



निचली अदालत में दिए बयान में कथित पीड़िता ने कहा था कि तीनों अभियुक्तों ने जब उसे फेंक दिया, उसके बाद शिकायत दर्ज कराने से पहले ज़रूरी सबूत जुटाने के लिए वो उस गैराज में गई जहां उसके साथ बलात्कार हुआ था.



लेकिन उसकी एक साथी ने बताया कि वो अभियुक्तों से अक्सर आर्थिक मदद लेती थी और घरेलू कामों के बाद रात के वक्त वेश्यावृत्ति भी करती थी. उसने अदालत को ये भी बताया कि कथित पीड़ित महिला ने अपने साथ बलात्कार के बाद अभियुक्तों से 1,000 रुपये भी मांगे थे जिसे उन्होंने देने से उन्होंने मना कर दिया.



जब उससे पूछा गया कि उसने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ शिकायत क्यों दर्ज कराई तो कथित पीड़ित महिला ने कहा कि वो चाहती है कि अदालत उसे अभियुक्तों से वो रक़म दिलाए जो वो चाहती है.

इस पर जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष और जस्टिस अमिताव रॉय की पीठ ने तीनों अभियुक्तों को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन आरोप साबित नहीं कर पाया है.





- (बीबीसी)
Tags :