🔴 TRENDING NOW!
पहली गैर-जीएमओ हाइब्रिड बीज किस्मों के शुभारंभ के साथ भारत ने पॉपकॉर्न मक्का खेती में रचा नया कीर्तिमान एक तरफ सीएम डॉ. मोहन का समृद्धि पर जोर, दूसरी तरफ विद्वानों ने बताया कैसे बनाएंगे MP को नंबर-1 दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे सीएम डॉ. मोहन, की अतिवृष्टि-राहत कार्यों की समीक्षा, जानें क्या दिए निर्देश? क्या संजय लीला भंसाली की अगली फिल्म में धनुष के साथ करीना कपूर आएंगी? एस. मित्रन ने दी बड़ी जानकारी भोपाल डिजिटल तरीके से डिजिटल वित्तीय सशक्तिकरण में भारत में सबसे आगे: होम क्रेडिट इंडिया ग्रेट इंडिया वॉलट स्टडी 2026 कंगना रनौत ने Gen Z को 'जेनरेशन गटर' कहने के बाद खुद को बताया Gen Alpha, बोलीं: सीधे मुद्दे की बात करो 'स्पिरिट' विवाद में नया दावा: दीपिका पादुकोण को पूरी कहानी कभी सुनाई ही नहीं गई? 44 लाख से ज्यादा लोगों को मिलेगा पीने का पानी, इसलिए परिवारों के करीब जाकर समझें परेशानी सीएम डॉ. मोहन का मास्टर स्ट्रोक, फिर शुरू होगी कैलारस शुगर मिल, जानें कब खुलेंगे टेंडर? "सजग मन ही सफलता की कुंजी है", स्वामी मित्रानंद सरस्वती ने आरएनटीयू में छात्रों से किया संवाद, बताए मेडिटेशन के फायदे

बैंकों के निजीकरण करने के विरोध में बैंक कर्मियों का प्रदर्शन, बैंक कर्मी हड़ताल के लिए तैयार रहें

👤
DD
👁 18379 व्यूज
📍 Bhopal
बैंकों के निजीकरण करने के विरोध में बैंक कर्मियों का प्रदर्शन, बैंक कर्मी हड़ताल के लिए तैयार रहें
9 मई 2017, राजधानी भोपाल में यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आव्हान पर बैंकों में निजीकरण के विरोध में सैकड़ों बैंक अधिकारी व कर्मचारी मंगलवार को एमपी नगर स्थित प्रेस काम्पलेक्स स्थित ओरियन्टल बैंक ऑफ कामर्स रीजनल कार्यालय के समक्ष अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद सभा हुई, जिसे फोरम के संयोजक संजीव मिश्रा, को-आर्डीनेटर साथी वीके शर्मा के अलावा साथी नज़ीर कुरैशी, मदन जैन, डीके पोद्दार, रजत मोहन वर्मा, संजय कुदेशिया, संतोष जैन, विजय सिंह नेगी, सुनील सिंह, राकेश जैन आदि ने सम्बोधित किया।



खराब ऋणों का आंकड़ा पहुंचा 13 लाख करोड़

वक्ताओं ने बताया कि वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सामने ढेर सारी चुनौतियां हैं। खराब ऋ णों में लगातार हो रही वृद्धि चिन्ता का विषय है। वर्तमान में यह 13 लाख करोड़ रूपये से ऊपर पहुँच गई है। इसमें से अधिकांश राशि बड़े-बड़े उद्योगपतियों एवं व्यापारिक घरानों के नाम है। ये लोग बैंकों में उगाही के नियमों की शिथिलता का फायदा उठकार राजनैतिक संरक्षण प्राप्त कर, जान-बूझकर बैंकों का ऋण नहीं चुका रहे हैं। यह अत्यन्त ही निराशाजनक है कि बैंकिंग उद्योग को दिन दहाड़े लूटने वालों से ऋण वसूली करने की बजाये उन्हें और ज्यादा ऋण सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं और खराब ऋणों को औने-पौने दामों में बेचा जा रहा हैं ।
Tags :