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डीपफेक तकनीक समाज के लिए नया खतरा

Location: भोपाल                                                 👤Posted By: prativad                                                                         Views: 4345

भोपाल: 25 नवंबर 2023। डीपफेक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक है जिसका उपयोग किसी व्यक्ति के चेहरे को किसी अन्य व्यक्ति के चेहरे से बदलने के लिए किया जाता है। यह तकनीक इतनी उन्नत है कि इसे मानव आंखों से पहचानना मुश्किल हो सकता है। डीपफेक का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जिनमें मनोरंजन, शिक्षा और पत्रकारिता शामिल हैं। हालांकि, डीपफेक का उपयोग गलत सूचना और धोखाधड़ी के लिए भी किया जा सकता है।

डीपफेक तकनीक समाज के लिए कई तरह से खतरा पैदा कर सकती है। सबसे पहले, डीपफेक का उपयोग मनुष्यों को बदनाम करने या धमकाने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक नेता के वीडियो को फर्जीवाड़ा करके उन्हें झूठ बोलते हुए दिखा सकता है। इससे उस नेता की छवि को नुकसान पहुंच सकता है और उनके राजनीतिक करियर को प्रभावित कर सकता है।

दूसरे, डीपफेक का उपयोग गलत सूचना फैलाने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति किसी नेता या संगठन के वीडियो को फर्जीवाड़ा करके उन्हें किसी गलत या हानिकारक कार्य को करते हुए दिखा सकता है। इससे जनता के बीच भ्रम पैदा हो सकता है और लोकतंत्र को नुकसान पहुंच सकता है।

तीसरे, डीपफेक का उपयोग धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति किसी बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी के वीडियो को फर्जीवाड़ा करके ग्राहकों से पैसे निकाल सकता है। इससे लोगों की आर्थिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

डीपफेक तकनीक के खतरों को कम करने के लिए सरकारों और निजी क्षेत्र को कई कदम उठाने की जरूरत है। इनमें शामिल हैं:

डीपफेक सामग्री को पहचानने और हटाने के लिए तकनीकों का विकास करना
डीपफेक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए कानून और विनियमन बनाना
जनता को डीपफेक तकनीक के खतरों के बारे में जागरूक करना
भारत सरकार ने हाल ही में डीपफेक सामग्री पर तत्काल नए नियम लागू करने की घोषणा की है। इन नियमों का उद्देश्य डीपफेक सामग्री के प्रसार को रोकना और जनता को इसकी पहचान करने में मदद करना है।

डीपफेक तकनीक एक शक्तिशाली उपकरण है जिसका उपयोग अच्छे या बुरे के लिए किया जा सकता है। यह महत्वपूर्ण है कि हम इस तकनीक के खतरों को समझें और उन्हें कम करने के लिए कदम उठाएं।

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