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दक्षिण एशिया में पड़ोसीपन चाहता है भारत, हमारी तरक्की से पूरे क्षेत्र को लाभ होगा: विदेश मंत्री जयशंकर

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 142

नई दिल्ली 2 जनवरी 2026। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत दक्षिण एशिया में “पड़ोसीपन” की भावना को मजबूत करना चाहता है और उसका स्पष्ट मानना है कि भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति से पूरे क्षेत्र को फायदा होगा। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव देखा जा रहा है और वहां अगले महीने आम चुनाव होने हैं।

शुक्रवार को अपने बयान में जयशंकर ने कहा, “अगर भारत आगे बढ़ता है, तो हमारे सभी पड़ोसी भी हमारे साथ आगे बढ़ेंगे। इससे उन्हें नए अवसर मिलेंगे।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि यही संदेश वे हाल ही में बांग्लादेश भी लेकर गए थे। “वहां चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। हमने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। हमें उम्मीद है कि हालात सामान्य होने के साथ इस क्षेत्र में पड़ोसीपन की भावना और मजबूत होगी।”

इस सप्ताह की शुरुआत में विदेश मंत्री ढाका गए थे, जहां उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया को श्रद्धांजलि दी। खालिदा जिया का 30 दिसंबर को निधन हो गया था।

बांग्लादेश में हालात तनावपूर्ण
बांग्लादेश में 2024 के विद्रोह से जुड़े प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद देश में हिंसा भड़क उठी है। हादी को इस महीने की शुरुआत में ढाका में अज्ञात नकाबपोश हमलावरों ने गोली मार दी थी। इसके बाद बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग उठी और कई जगह भारत विरोधी नारे लगे।

हिंसक प्रदर्शन के दौरान दो प्रमुख अखबारों के दफ्तरों पर हमले और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। भीड़ पर हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के आरोप भी लगे हैं।

भारत ने बांग्लादेश में हुई हालिया हिंसा की कड़ी निंदा की है और कहा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना वहां की अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है।

चुनाव और सियासी संकट
बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनाव 12 फरवरी को प्रस्तावित हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग, जो विद्रोह से पहले करीब 15 साल तक सत्ता में रही, को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। एक अदालत ने 2024 के विद्रोह के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के आदेश देने के मामले में हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी सरकार गिर गई और वह फिलहाल भारत में निर्वासन में रह रही हैं।

ढाका लगातार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है और भारत पर बांग्लादेश के खिलाफ हितों का समर्थन करने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, नई दिल्ली ने साफ किया है कि उसने कभी भी अपने क्षेत्र का इस्तेमाल बांग्लादेश के खिलाफ किसी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया है।

विदेश मंत्री के बयान से भारत का रुख एक बार फिर साफ है। क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता भारत की प्राथमिकता है, लेकिन जिम्मेदारी और कानून व्यवस्था से समझौता नहीं।

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