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भारत कंबाइंड रॉकेट–मिसाइल फोर्स के गठन पर विचार कर रहा है: सेना प्रमुख

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📍 भोपाल
भारत कंबाइंड रॉकेट–मिसाइल फोर्स के गठन पर विचार कर रहा है: सेना प्रमुख
14 जनवरी 2026। भारतीय सेना युद्धक क्षमता को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि भारत एक कंबाइंड रॉकेट–मिसाइल फोर्स के गठन पर गंभीरता से विचार कर रहा है, ताकि अलग-अलग रेंज के लक्ष्यों को एकीकृत और प्रभावी तरीके से निशाना बनाया जा सके।

15 जनवरी को 78वें सेना दिवस से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि बदलते युद्ध परिदृश्य में हथियार प्रणालियों का अपग्रेड होना अब विकल्प नहीं, जरूरत है। उनके शब्दों में, “रॉकेट और मिसाइलें एक-दूसरे की पूरक हैं। चीन और पाकिस्तान पहले ही अपनी रॉकेट फोर्स बना चुके हैं। ऐसे में भारत के लिए भी एक समेकित रॉकेट–मिसाइल फोर्स बनाना समय की मांग है।”

सेना प्रमुख ने यह भी साफ किया कि इस फोर्स को जितनी जल्दी व्यवस्थित किया जाएगा, उतना ही देश की युद्धक तैयारी को फायदा होगा। उनका यह बयान सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन गतिविधियों की बढ़ती घटनाओं के बीच आया है। हाल ही में राजस्थान के जैसलमेर में संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए, वहीं जम्मू क्षेत्र में भी ड्रोन मूवमेंट के बाद सेना को फायरिंग करनी पड़ी।

जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारत के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस ने इस मुद्दे पर अपने पाकिस्तानी समकक्ष से साफ शब्दों में कहा है कि ऐसी ड्रोन घुसपैठ किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।

सेना प्रमुख ने याद दिलाया कि मई 2025 में भारत–पाकिस्तान के बीच हुई एक संक्षिप्त लेकिन तीव्र झड़प में ड्रोन की भूमिका अहम रही थी। उस दौरान भारतीय एंटी-ड्रोन सिस्टम ने 300 से अधिक ड्रोन और अन्य हवाई प्लेटफॉर्म्स को निष्क्रिय किया था।

प्रस्तावित रॉकेट–मिसाइल फोर्स की रीढ़ लंबी दूरी के पिनाका रॉकेट, स्वदेशी प्रलय मिसाइल और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल हो सकती है। हाल ही में पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का सफल परीक्षण किया गया है, जिसकी मारक क्षमता 120 किलोमीटर तक बताई जा रही है। प्रलय मिसाइल अलग-अलग लक्ष्यों के लिए विभिन्न प्रकार के वॉरहेड ले जाने में सक्षम है।

वहीं ब्रह्मोस, जो DRDO और रूस के NPO माशिनोस्ट्रोयेनिया का संयुक्त उत्पाद है, जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से दागी जा सकने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।

सूत्रों के अनुसार, चीन और पाकिस्तान के मजबूत कमांड सेंटरों को ध्यान में रखते हुए भारत उन्नत बंकर-बस्टर क्षमताओं के विकास पर भी तेजी से काम कर रहा है। साफ है, भविष्य की लड़ाइयों के लिए भारत अब सिर्फ तैयार नहीं रहना चाहता, बल्कि एक कदम आगे रहना चाहता है।
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