16 जनवरी 2026। अमेरिका के सख्त टैरिफ और भारत–चीन संबंधों में आई नरमी के बीच दिसंबर में चीन को भारत का निर्यात तेज़ी से बढ़ा है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर में चीन भेजे गए भारतीय सामान में साल-दर-साल 67.35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पादों और कृषि वस्तुओं की मजबूत मांग के चलते दिसंबर में चीन को निर्यात बढ़कर 2.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में चीन से भारत का आयात भी 20 प्रतिशत बढ़कर 11.7 अरब डॉलर रहा। चीन अमेरिका के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच कुल व्यापार के लिहाज से चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। इस दौरान भारत–चीन व्यापार 110.20 अरब डॉलर रहा, जबकि भारत–अमेरिका व्यापार 105.31 अरब डॉलर पर सिमट गया।
चीन को निर्यात में यह तेजी ऐसे वक्त आई है, जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा रखे हैं। CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, इन टैरिफ का असर दिसंबर में साफ दिखा और अमेरिका को भारत का निर्यात 1.8 प्रतिशत घटकर 6.8 अरब डॉलर रह गया।
इधर, 2020 में सीमा पर हुए तनाव के बाद भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। सितंबर 2025 में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई, जिसमें सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
भारत सरकार सीमा तनाव के बाद लगाए गए उन प्रतिबंधों को हटाने की तैयारी में है, जिनके तहत चीनी कंपनियों को सरकारी ठेकों में बोली लगाने से रोका गया था। साथ ही, पांच साल बाद अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू हो गईं और दिसंबर में चीन ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा नियमों में भी ढील दी।
दूसरी ओर, अमेरिका ने अगस्त 2025 में भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसमें से आधा शुल्क रूसी तेल की खरीद को लेकर था। भारत का स्पष्ट रुख है कि ऊर्जा खरीद उसके राष्ट्रीय हितों के आधार पर होती है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की लगातार टैरिफ बढ़ाने की चेतावनियों के बीच यह अब तक अंतिम रूप नहीं ले पाई है। ट्रम्प ने रूस के व्यापारिक साझेदार देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाले द्विदलीय विधेयक का भी समर्थन किया है। साथ ही, ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दी गई है।
गौरतलब है कि भारत ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है, ऐसे में वैश्विक व्यापार तनावों का असर आने वाले समय में भारत की रणनीति पर और गहरा हो सकता है।














