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मस्क का दावा: ‘वैश्विक सत्ता का संतुलन बदल रहा है’, GDP ग्रोथ में भारत-चीन अमेरिका से आगे

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📍 भोपाल
मस्क का दावा: ‘वैश्विक सत्ता का संतुलन बदल रहा है’, GDP ग्रोथ में भारत-चीन अमेरिका से आगे
2 फरवरी 2026। दुनिया की आर्थिक तस्वीर तेज़ी से बदल रही है और इसके संकेत अब आंकड़ों में साफ दिखने लगे हैं। टेक अरबपति एलन मस्क का कहना है कि वैश्विक सत्ता संतुलन एशिया की ओर खिसक रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2026 में वैश्विक रियल GDP ग्रोथ में भारत और चीन का योगदान अमेरिका से अधिक होगा।

IMF के डेटा पर आधारित एक ग्राफिक के जवाब में मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “सत्ता का संतुलन बदल रहा है।” आंकड़ों के मुताबिक वैश्विक रियल GDP ग्रोथ में चीन की हिस्सेदारी 26.6 प्रतिशत है, भारत 17 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि अमेरिका का योगदान 9.9 प्रतिशत बताया गया है।



मस्क की इस पोस्ट पर भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत और चीन मिलकर अनुमानित वैश्विक GDP वृद्धि का करीब 43 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने इस पर रिपोर्ट प्रकाशित की।

इसी बीच भारत के वित्त मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था में स्थिर वृद्धि की संभावना बनी हुई है। मंत्रालय के अनुसार, मजबूत घरेलू मांग के कारण 2026-27 वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रफ्तार कायम रह सकती है।

आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की GDP ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रह सकती है, जबकि FY2027 में यह 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है।

भारत के पूर्व विदेश सचिव अनिल वाधवा का कहना है कि यह ट्रेंड नया नहीं है। RT से बातचीत में उन्होंने कहा, “काफी समय से साफ है कि भारत और चीन बाकी दुनिया की तुलना में तेज़ी से बढ़ रहे हैं।”

वाधवा के मुताबिक दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी भी हैं और पूरक भी। उन्होंने बताया कि चीन अब उच्च-प्रौद्योगिकी और सटीक मशीनरी पर ज्यादा फोकस कर रहा है, जबकि भारत के श्रम-गहन सेक्टर को चीन जैसे बड़े बाजारों में जगह मिल रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के बाद चीन के टेक्सटाइल मार्केट में भारतीय हिस्सेदारी बढ़ी है।

भारत ने हाल के वर्षों में अपने व्यापारिक रिश्तों को व्यापक करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। पिछले साल भारत ने ब्रिटेन, ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार समझौते किए, जबकि इसी महीने की शुरुआत में यूरोपीय संघ के साथ भी एक अहम समझौता हुआ। यह रणनीति अमेरिका पर निर्भरता कम करने के प्रयास के तौर पर देखी जा रही है।

BRICS देशों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों पर प्रतिक्रिया देते हुए वाधवा ने कहा कि इस समूह के पास अंदरूनी ताकत और संसाधन दोनों हैं, जो बाहरी दबावों के बावजूद उसे आगे बढ़ने में सक्षम बनाते हैं।

वाधवा ने यह भी जोड़ा कि जो अर्थव्यवस्थाएं दशकों पहले ही औद्योगिक हो चुकी हैं, उनके लिए ऊंचे बेस से धीमा होना स्वाभाविक है, जबकि उभरते बाजारों के पास अभी विस्तार की काफी गुंजाइश है।

इसी बीच मस्क की कंपनियों की भारत में मौजूदगी भी बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक SpaceX भारत में अपनी स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के अंतिम चरण में है और उसने रिलायंस जियो और एयरटेल के साथ समझौते किए हैं। वहीं टेस्ला ने पिछले साल जुलाई में भारतीय बाजार में एंट्री करते हुए मॉडल Y लॉन्च किया था। कंपनी के शोरूम फिलहाल नई दिल्ली और मुंबई में संचालित हो रहे हैं।
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