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सेमिकॉन इंडिया को रफ्तार: 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाएं मंजूर, आईटी सेक्टर की आय 283 अरब डॉलर तक पहुंची

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 129

नई दिल्ली 4 फरवरी 2026। भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब कागजों से निकलकर जमीन पर उतरता दिख रहा है। ‘सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम’ के तहत सरकार ने अब तक 10 बड़ी सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है, जिनमें कुल निवेश करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का है। इन परियोजनाओं के साथ भारत न सिर्फ चिप डिजाइन बल्कि निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण तक एक पूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

यह रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड विजन से प्रेरित है। इसी सोच के तहत केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 76,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम शुरू किया है।

दो फैब, आठ पैकेजिंग यूनिट्स को हरी झंडी
मंजूर की गई 10 परियोजनाओं में दो फैब्रिकेशन यूनिट (फैब) और आठ सेमीकंडक्टर पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। इनमें सिलिकॉन आधारित सीएमओएस फैब, सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एडवांस्ड और मेमोरी पैकेजिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं। ये सभी परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में कार्यान्वयन के दौर से गुजर रही हैं और चार इकाइयों में प्रायोगिक उत्पादन भी शुरू हो चुका है।

स्टार्टअप्स और विश्वविद्यालय भी खेल में
सरकार ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 24 चिप डिजाइन परियोजनाओं का समर्थन किया है। इनमें से 16 स्टार्टअप्स ने टेपआउट पूरा कर लिया है, जबकि 13 को वेंचर कैपिटल फंडिंग भी हासिल हो चुकी है।

इसके साथ ही 350 विश्वविद्यालयों को ईडीए टूल्स की सुविधा दी गई है, जिनका इस्तेमाल करीब 65 हजार इंजीनियर कर रहे हैं। साफ है कि सरकार केवल फैक्ट्रियां नहीं, बल्कि भविष्य की प्रतिभा भी तैयार कर रही है।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन को अहम जिम्मेदारी
सेमीकंडक्टर परियोजनाओं के मूल्यांकन और सिफारिश के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, ताकि फैसले सिर्फ तकनीकी नहीं, रणनीतिक भी हों।

आईटी सेक्टर ने भी दिखाई मजबूती
सेमीकंडक्टर के साथ-साथ आईटी सेक्टर की ग्रोथ भी सरकार के लिए राहत की खबर है। नैसकॉम के आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में भारत के आईटी क्षेत्र का कुल राजस्व बढ़कर 283 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें 224.4 अरब डॉलर का योगदान निर्यात से और 58.2 अरब डॉलर घरेलू बाजार से रहा।

पिछले पांच वर्षों में आईटी सेक्टर का कुल राजस्व 196 अरब डॉलर (2020-21) से बढ़कर 283 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो इस उद्योग की स्थिर और दीर्घकालिक ग्रोथ को दर्शाता है।

भारत बन रहा है सेमीकंडक्टर हब
गुजरात, असम, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में मंजूर की गई सेमीकंडक्टर परियोजनाएं यह संकेत देती हैं कि भारत एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहता। माइक्रोन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, सीजी पावर, केयन्स टेक्नोलॉजी, 3डी ग्लास सॉल्यूशंस और सीडीआईएल जैसी कंपनियों की मौजूदगी से साफ है कि ग्लोबल और घरेलू दोनों निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
कुल मिलाकर, सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम और आईटी सेक्टर की बढ़ती कमाई यह साफ संकेत देती है कि भारत टेक्नोलॉजी कंज्यूमर से टेक्नोलॉजी क्रिएटर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। अब असली परीक्षा समय पर क्रियान्वयन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने की होगी।

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