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डीएलआई योजना से रफ्तार पकड़ रहा भारतीय चिप डिजाइन सेक्टर, सी2आई ने जुटाए 15 मिलियन डॉलर

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 85

16 फरवरी 2026। भारत का सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है। डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव यानी DLI योजना के तहत समर्थित स्टार्टअप अब बड़े निवेशकों की नजर में हैं। ताजा उदाहरण है बेंगलुरु स्थित C2i Semiconductors, जिसने 15 मिलियन डॉलर की सीरीज फंडिंग जुटाई है। यह किसी भारतीय सेमीकंडक्टर स्टार्टअप द्वारा अब तक की सबसे बड़ी फंडिंग मानी जा रही है।

बड़े नामों का भरोसा
इस राउंड का नेतृत्व Peak XV Partners ने किया। इससे पहले कंपनी को 2024 में Yali Capital की अगुवाई में 4 मिलियन डॉलर मिले थे। ताजा निवेश के बाद कुल फंडिंग लगभग 170 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

पीक एक्सवी के मैनेजिंग डायरेक्टर Rajan Anandan का मानना है कि सी2आई की पावर मैनेजमेंट तकनीक जीपीयू की उम्र बढ़ाकर उद्योग को अरबों डॉलर की बचत करा सकती है।

डीएलआई योजना से मिला शुरुआती सहारा
सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स के सामने आमतौर पर लंबा विकास चक्र, भारी आरएंडडी खर्च और तकनीकी जोखिम जैसी चुनौतियां होती हैं। इसी वजह से 2021 से पहले इस क्षेत्र में वेंचर कैपिटल निवेश सीमित रहा।

2022 में घोषित डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना ने इस स्थिति को बदला। योजना के तहत वित्तीय सहायता, उन्नत ईडीए टूल्स, आईपी कोर और विशेषज्ञ मूल्यांकन जैसी सुविधाएं दी गईं। इससे शुरुआती जोखिम कम हुआ और निवेशकों का भरोसा बढ़ा।

सी2आई को नवंबर 2024 से इस योजना के तहत मंजूरी मिली। कंपनी चिपइन केंद्र के ईडीए टूल ग्रिड की टॉप तीन उपयोगकर्ताओं में शामिल रही है।

कौन है सी2आई?
5 जून 2024 को बेंगलुरु में स्थापित सी2आई की संस्थापक टीम का अनुभव Texas Instruments, National Semiconductor और Maxim Integrated जैसी वैश्विक कंपनियों में रहा है।

सेमीकंडक्टर उद्योग के वरिष्ठ विशेषज्ञ Ganapathy Subramaniam, जो याली कैपिटल के संस्थापक प्रबंध भागीदार हैं, कंपनी के बोर्ड में शामिल हैं।

कंपनी ने कुछ ही महीनों में अपनी इंजीनियरिंग टीम 65 इंजीनियरों तक बढ़ा ली है।

समस्या क्या है?
एआई आधारित वर्कलोड के बढ़ने से आधुनिक डेटा सेंटरों में बिजली आपूर्ति सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पुराने पावर सिस्टम लगातार हाई-डेंसिटी कंप्यूटिंग के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए थे। इसका नतीजा है ऊर्जा हानि, ज्यादा गर्मी और विश्वसनीयता की दिक्कतें।

सी2आई का समाधान
सी2आई “ग्रिड-टू-कोर” अप्रोच पर काम कर रही है। यानी ग्रिड से लेकर प्रोसेसर चिप तक बिजली प्रवाह को नए तरीके से डिजाइन किया जा रहा है।

कंपनी एक स्मार्ट और कॉन्फिगरेबल पावर प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है, जो रियल टाइम में बिजली आपूर्ति को मैनेज और ऑप्टिमाइज कर सकता है। इससे:
एआई वर्कलोड के दौरान भी स्थिर बिजली सप्लाई
ऊर्जा दक्षता में सुधार
गर्मी और फेल्योर में कमी
उपकरणों की लंबी उम्र
डेटा सेंटर विस्तार में सुविधा

कंपनी को उम्मीद है कि उसके पहले सिलिकॉन डिजाइन इस साल मध्य तक निर्माण से मिल जाएंगे, जिसके बाद प्रदर्शन का सत्यापन किया जाएगा।

नीति और निवेश का संगम
केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत का सेमीकंडक्टर कार्यक्रम केवल मैन्युफैक्चरिंग नहीं, बल्कि डिजाइन क्षमता और घरेलू बौद्धिक संपदा पर भी केंद्रित है।

सी2आई में हुआ यह बड़ा निवेश उसी दिशा का संकेत है। साफ है, भारत अब सिर्फ चिप उपभोक्ता नहीं रहना चाहता। वह डिजाइन और तकनीक के स्तर पर खेल बदलने की तैयारी में है।

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